डेस्क- पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसदों के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने का मामला अब सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी 20 सांसदों को नोटिस जारी किया है. यह कदम इन सांसदों के भविष्य और साथ ही तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति के लिए बड़ा मोड़ साबित हो सकता है.
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब तृणमूल कांग्रेस के ये 20 सांसद, जिनमें कई सीनियर नेता भी शामिल थे, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में शामिल हो गए.
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यह नोटिस तृणमूल कांग्रेस की ओर से दायर एक याचिका के जवाब में आया है, जिसमें इन सांसदों की पार्टी से बग़ावत और एनडीए में शामिल होने को पार्टी विरोधी कदम बताया गया है. याचिका में इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग भी की गई है.
सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने यह नोटिस सांसदों को व्यक्तिगत रूप से तामील कराने के निर्देश दिए हैं. हालांकि अभी तक सभी 20 सांसदों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इनमें से कई सांसद तृणमूल कांग्रेस के पुराने और जाने-माने चेहरे हैं. इनमें से कुछ सांसद उन क्षेत्रों से आते हैं जहाँ तृणमूल कांग्रेस की पकड़ मज़बूत मानी जाती है.
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वहीं, एनडीए गठबंधन, जिसमें बीजेपी प्रमुख है, इन सांसदों के शामिल होने का स्वागत कर चुका है. बीजेपी का कहना है कि यह पश्चिम बंगाल में पार्टी के बढ़ते प्रभाव का नतीजा है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि ये सांसद जनता की आवाज़ बनकर एनडीए में शामिल हुए हैं और वे उनके फैसले का सम्मान करते हैं.








