डेस्क- दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया. पहली बार ऐसा हुआ कि दुनिया भारत के Gen Z के मीम्स, नारों और वायरल वीडियो पर सिर्फ हंस नहीं रही थी, बल्कि उनसे सीख भी रही थी.
पड़ोसी देशों से आई प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि भारत का यह छात्र आंदोलन सीमाओं से परे जाकर युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है. श्रीलंका, नेपाल और पाकिस्तान के कई युवाओं ने भारतीय छात्रों की एकजुटता, साहस और रचनात्मक विरोध को लोकतांत्रिक आंदोलन की नई मिसाल बताया.
बीबीसी से बातचीत में पाकिस्तान की एक युवती ने कहा, ‘कहीं प्यार न हो जाए… इतना अच्छा करोगे तो मैं नफरत कैसे करूंगी?’ उसके मुताबिक भारत के Gen Z ने जिस साहस और एकजुटता का परिचय दिया, उससे प्रभावित हुए बिना रहना मुश्किल है.
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पाकिस्तान के कई युवाओं ने कहा कि अगर उन्हें मौका मिलता तो वे भी भारतीय छात्रों की तरह सड़कों पर उतरते. एक युवक ने कहा, ‘कॉकरोच जनता पार्टी बहुत कूल है.वे जरूरत से ज्यादा गंभीर नहीं रहते और यही बात मुझे पसंद है. Gen Z का कोई मुकाबला नहीं है.’
भारत के छात्र आंदोलन ने श्रीलंका के युवाओं को भी प्रभावित किया. 2022 के श्रीलंकाई जन आंदोलन में शामिल रहे सामाजिक कार्यकर्ता बुवानका परेरा ने इंस्टाग्राम पर भारतीय युवाओं के नाम संदेश लिखा.
उन्होंने कहा, ‘युवा आंदोलनों की जो चिंगारी श्रीलंका से निकली और पूरे एशिया में फैली, उससे भारत लंबे समय तक अछूता दिख रहा था. लेकिन आज भारतीय युवाओं को अपने संविधान और संस्थापकों के सपनों वाले भारत के लिए संघर्ष करते देख आंखों में खुशी के आंसू आ जाते हैं.’
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उन्होंने भारतीय छात्रों से कहा, ‘एक युवा प्रदर्शनकारी की ओर से दूसरे युवा प्रदर्शनकारी के लिए संदेश है- हिम्मत मत हारिए और लड़ाई जारी रखिए.’
नेपाल में भी भारत के Gen Z आंदोलन को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. काठमांडू के कॉन्टेंट क्रिएटर अविनाश मिश्रा ने कहा कि भारतीय छात्रों का गुस्सा पूरी तरह जायज है और इसे ओवररिएक्शन कहकर खारिज नहीं किया जा सकता.
इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए अपने वीडियो में अविनाश मिश्रा ने भारतीय छात्रों से कहा, ‘आप जो महसूस कर रहे हैं, वह पूरी तरह जायज है. किसी को यह मत कहने दीजिए कि आप जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया दे रहे हैं. हमेशा याद रखिए कि आपका लक्ष्य क्या है. आंदोलन शुरू होने के बाद अक्सर लोग असली मकसद भूल जाते हैं.’
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