डेस्क- पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए भारत सरकार ने मंगलवार को टेलीग्राम पर टेंपरेरी बैन लगाया था. अब इस आदेश के खिलाफ टेलीग्राम कोर्ट पहुंच गई है. टेलीग्राम ने दिल्ली हाई कोर्ट में सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए राहत की मांग की है.
आज इस मामले की सुनवाई होगी. बता दें कि भारत सरकार ने 22 जून तक टेलीग्राम की एक्सेस बैन कर दी है और 30 जून तक इसके मैसेज एडिट करने के फीचर को डिसेबल रखने का आदेश दिया है. एग्जाम लीक की घटनाओं में टेलीग्राम जैसी ऐप्स के इस्तेमाल की घटनाओं को देखते हुए यह फैसला लिया गया था.
भारत सरकार के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए टेलीग्राम के फाउंडर ने इसे गलत बताया था. उन्होंने एक्स पर लिखा कि भारत सरकार ने टेलीग्राम को एक हफ्ते के लिए बैन कर दिया क्योंकि कुछ यूजर्स ने इस पर लीक हुए एग्जाम पेपर शेयर किए थे.
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यह 15 करोड़ से ज्यादा टेलीग्राम यूजर को सजा दी जा रही है न कि उन इनसाइडर्स को जिन्होंने पेपर लीक किया था. इस बैन से भी कुछ बंद नहीं हुआ है. अब दूसरी ऐप्स के जरिए लीक की घटनाएं हो रही हैं.
टेलीग्राम की ओर से दायर याचिका का उल्लेख जस्टिस तेजस करिया की अदालत में किया गया, जिसके बाद उन्होंने बुधवार को ही मामले की सुनवाई के लिए सहमति दे दी. कंपनी का कहना है कि ऐप पर लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध उचित नहीं है.
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर 22 जून तक टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगा दी है. यह प्रतिबंध 21 जून को होने वाले NEET-UG री-एग्जाम और उसके तुरंत बाद तक लागू रहेगा. सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैल रहे फर्जी पेपर लीक और गलत सूचनाओं को रोकने के लिए यह फैसला लिया गया.
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सरकार की तरफ से कहा गया है कि IT कानून के तहत यह फैसला लिया गया है ताकि पेपर लीक की घटनाओं में शामिल लोग इस प्लेटफॉर्म को यूज न कर पाएं.
इसके अलावा टेलीग्राम के कुछ फीचर्स भी फैसले का कारण बने हैं. टेलीग्राम पर बड़े ग्रुप बनाने की सुविधा, सीक्रेसी और बड़े साइज की फाइल्स शेयर करने जैसे फीचर्स हैं, जो चीटिंग नेटवर्क चलाने वाले लोगों के काम आ सकते हैं.








