पटना- बिहार के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) पी.के. शाही ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राज्य सरकार को सौंप दिया है। नीतीश कुमार की सरकार में वह महाधिवक्ता बनाए गए थे।
पी.के. शाही लंबे समय से बिहार की राजनीति और कानून के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में पहले शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। बाद में उन्हें बिहार का महाधिवक्ता नियुक्त किया गया था।
हालांकि, उनके इस्तीफे के कारणों का आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया गया है। उनके इस्तीफे के बाद राज्य के कानूनी और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता पी.के. शाही का बिहार सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ लंबे समय से गहरा जुड़ाव रहा है।
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नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री काल में पीके शाही 2005 से 2010 तक भी बिहार के महाधिवक्ता रह चुके हैं. नीतीश कुमार ने उनको 2010 से 2015 तक बिहार शिक्षा मंत्री भी बनाया.
2023 में पीके शाही बिहार के 22वें महाधिवक्ता के रूप में जिम्मेवारी संभाली थी लेकिन अब बिहार में सम्राट चौधरी की सरकार बनने के बाद पीके शाही ने इस्तीफा देने का बड़ा फैसला लिया है.
महाधिवक्ता बनने के बाद से पी.के. शाही लगातार पटना हाईकोर्ट में बिहार सरकार का पक्ष रखते रहे और सरकार के प्रमुख कानूनी सलाहकार की भूमिका निभाते रहे।
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महाधिवक्ता पीके शाही का पूरा नाम प्रशांत किशोर शाही है. उनका जन्म 3 जुलाई 1955 को हुआ था. बीएचयू से 1979 में उन्होंने लॉ की डिग्री हासिल की. इसके बाद 1980 में वह बार काउंसिल में शामिल हुए और पटना उच्च न्यायालय में वकालत शुरू की.
1990 में महज 35 वर्ष की उम्र में वह हाईकोर्ट में सरकारी वकील नियुक्त हुए. 2005 में नीतीश कुमार की सरकार ने एडवोकेट जनरल नियुक्त किया. शिक्षा मंत्री के अलावे पर्यावरण एवं वन और योजना विभाग की भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.








