डेस्क- नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना करने के बाद विजयादशमी आते ही श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था. महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर झूमती नजर आईं. इस परंपरा में बंगाली समुदाय के साथ अन्य लोग भी शामिल होते हैं.
विजयादशमी के मौके पर मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन से ठीक पहले सुहागिन महिलाएं देवी मां की विशेष आरती और विदाई अनुष्ठान करती हैं, जिसे देवी बोरोन कहा जाता है.
इस दौरान महिलाएं पान के पत्ते को अपने हाथों में लेकर उससे मां दुर्गा के मुखमंडल का स्पर्श करती हैं. इसके बाद मां के मस्तक और चरणों में सिंदूर लगाया जाता है. उन्हें मिठाई और पान अर्पित कर सुखी और अखंड सौभाग्यवती रहने का आशीर्वाद मांगा जाता है.
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देवी बोरोन के बाद महिलाएं एक-दूसरे के माथे, गालों और चेहरे पर सिंदूर लगाती हैं. यह उत्सव एक-दूसरे के वैवाहिक सुख, पति की दीर्घायु और समृद्धि की मंगलकामना के लिए मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं पारंपरिक रूप से लाल बॉर्डर वाली सफेद या लाल-सफेद साड़ी और हाथों में शंखा-पोला धारण करती हैं.








