रांची- राजधानी रांची के डोरंडा स्थित जैप-1 परिसर में महानवमी के अवसर पर गोरखा बटालियन की वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा देखने को मिली.
यहां मां दुर्गा की आराधना के साथ जवानों ने अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा की और मां भवानी से उनकी सलामती की कामना की. इसके बाद फायरिंग कर मां को सलामी देने की परंपरा भी निभाई गई.
पारंपरिक खुखरी, राइफल और इंसास को साफ-सुथरा कर कतार में रखा गया. इसके बाद हथियारों पर फूल-माला चढ़ाकर तिलक लगाया गया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई. इस दौरान नौ कन्याओं का पूजन और हवन भी हुआ.
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गोरखा बटालियन में दुर्गा पूजा का यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जवानों की सुरक्षा और कर्तव्य के प्रति समर्पण का प्रतीक भी है.
बटालियन की परंपरा के अनुसार, महानवमी पर शस्त्रों की पूजा कर मां दुर्गा से प्रार्थना की जाती है कि ड्यूटी के दौरान जवान सुरक्षित रहें और उनके हथियार हर परिस्थिति में देश, राज्य और समाज की रक्षा में सहायक साबित हों.
महानवमी पर नौ दिनों से चल रही पूजा-अर्चना का समापन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ. सबसे पहले नौ कन्याओं का पूजन किया गया. इसके बाद हवन कर मां दुर्गा से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई.
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बटालियन की परंपरा के अनुसार, विभिन्न कंपनियों की ओर से बलि अर्पित करने की रस्म भी निभाई गई. पूरे परिसर में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना रहा.
जैप-1 परिसर में गोरखा बटालियन की दुर्गा पूजा अपनी अलग पहचान रखती है. यहां मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने के बजाय कलश को देवी का स्वरूप मानकर पूजा-अर्चना की जाती है.
बटालियन में यह परंपरा वर्ष 1880 से निभाई जा रही है. इस तरह करीब 146 वर्षों से चली आ रही यह धार्मिक परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ जारी है. कलश स्थापना के साथ शुरू होने वाली पूजा में जवानों के साथ उनके परिवार के सदस्य भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं.








