नालंदा- नालंदा के 5 शिक्षकों पर निगरानी विभाग ने शिकंजा कसा है. फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने के आरोप में इनपर कार्रवाई करते हुए FIR दर्ज करवाया गया है.
निगरानी विभाग की टीम ने पटना हाईकोर्ट के आदेश पर चल रही जांच के दौरान हिलसा, राजगीर और सिलाव प्रखंडों के पांच शिक्षकों के खिलाफ अलग-अलग थानों में मुकदमा दर्ज कराया है. इन शिक्षकों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप है.
हिलसा प्रखंड के पचरुखिया उत्क्रमित मध्य विद्यालय की शिक्षिका पर सबसे पहले शिकंजा कसा गया. वर्ष 2013 में नियोजित शारदा रानी ने उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर (ओडिशा) का बीएड प्रमाणपत्र पेश किया था. निगरानी विभाग द्वारा रोल नंबर, नाम और पंजीयन संख्या की जांच कराए जाने पर विश्वविद्यालय ने प्रमाणपत्र को फर्जी बताते हुए खारिज कर दिया.
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वहीं, राजगीर प्रखंड के अंडवस मध्य विद्यालय के मो. जाहिद परवेज, सिलाव प्रखंड के धामर उत्क्रमित मध्य विद्यालय के सुबोध कुमार, पचवारा उत्क्रमित मध्य विद्यालय के नीरज कुमार और नानंद मध्य विद्यालय के मणि शंकर शर्मा पर भी फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी करने का आरोप है. सभी मामलों में जांच जारी है.
बता दें नालंदा जिले में अब तक कुल 80 शिक्षकों के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के मामले दर्ज हो चुके हैं. जांच में पाया गया कि इन शिक्षकों के प्रमाणपत्र संबंधित विश्वविद्यालयों के रिकॉर्ड से मैच नहीं कर रहे हैं. इस खुलासे से जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है.
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