पटना- चर्चित पूर्व आईपीएस सह महावीर मंदिर पटना न्यास समिति के सचिव का निधन हो गया. कुणाल किशोर ऐसे अधिकारी थे, जिन्होंने बॉबी हत्याकांड की जांच कर सरकार हिला दी थी. तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा की कुर्सी खतरे में आ गयी थी, लेकिन सत्ताधीशों ने CBI को केस सौंप केस पलट दिया था.
80 के दशक में किशोर कुणाल पटना के एसपी बने और उसी दौरान बिहार का सबसे चर्चित बॉबी हत्याकांड हुआ, जिसमें सबूत थे, सुराग थे, लेकिन दोषी कोई नहीं था. किशोर कुणाल ने अपनी किताब “दमन तक्षकों का” में इस वारदात का जिक्र किया है.
किशोर कुणाल के पटना एसपी की कमान संभालने के कुछ दिन बाद ही ये मामला अखबारों की सुर्खियां बन गया. किशोर कुणाल ने इन्हीं अखबारों की खबर को आधार बनाया और उस पर एक यूडी केस दर्ज कर दिया.
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इसके बाद फौरन ही बॉबी की लाश को कब्रिस्तान से निकाला गया, फिस पोस्टमार्टम भी कराया गया. उस वक्त किसी ने ऐसा सोचा भी नहीं था कि इन्वेस्टिगेशन इतनी तेजी से हो सकता है, लेकिन किशोर कुणाल ने न केवल तेजी से अनुसंधान किया बल्कि वो कातिल के काफी करीब पहुंच गये.
बॉबी मर्डर केस के रिकार्ड के अनुसार अदालत को दिए बयान में बॉबी की कथित मां ने बताया था कि बॉबी को कब और किसने जहर दिया था. कुणाल की इन्वेस्टिगेशन से ये बात साफ हो गई कि श्वेतानिशा उर्फ बॉबी की मौत हादसा या खुदकुशी नहीं बल्कि हत्या थी.
सत्ता सिंहासन को डोलता देख तत्कालीन मुख्यमंत्री ने अंततः जांच सीबीआई को सौंप दी. जांच हुई और आखिर में सीबीआई से आरोपियों को अभयदान मिल गया. जांच में आरोपी दोषमुक्त करार दिए गए.
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पटना से दिल्ली तक की सियासत में भूचाल ला देनेवाले इस हत्याकांड का जिक्र किशोर कुणाल ने अपनी “किताब दमन तक्षकों का” में किया जहां उन्होंने एक दोहा लिखा- “समरथ को नहिं दोष गुसाईं”.








