पटना- पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित चोरबागान में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ और मध्य प्रदेश के ग्वालियर में बेकाबू ट्रक की चपेट में आने से श्रद्धालुओं के साथ हुए हादसे के बाद पटना जिला प्रशासन और बिहार पुलिस सतर्क हो गए हैं.
आगामी त्योहारों, पूजा पंडालों में उमड़ने वाली भीड़ और प्रतिमा विसर्जन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है. प्रशासन का जोर भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है.
पटना के प्रमुख चौराहों, पूजा पंडालों और जुलूस मार्गों पर पुलिस की निगरानी बढ़ाई गई है. पटना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था के लिए करीब 2,000 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों के साथ विशेष पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की 14 कंपनियों की तैनाती की गई है.
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डाकबंगला चौराहा, गांधी मैदान, बोरिंग रोड, बेली रोड और पटना सिटी जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में पुलिसकर्मियों के साथ दंडाधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित की गई है.
भीड़ के दबाव, अव्यवस्था और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए आधुनिक निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. प्रमुख पूजा पंडालों, चौराहों और विसर्जन मार्गों की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली जा रही है.
इसके लिए 25 डीएसपी स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपे जाने की जानकारी दी गई है. वहीं, 53 से अधिक संवेदनशील स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था की गई है.
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कंट्रोल रूम से निगरानी के साथ छिनतई, छेड़खानी और अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई के लिए विशेष पुलिस टीमों को भी सक्रिय रखा जा रहा है. सादे लिबास में पुलिसकर्मियों की तैनाती और मोबाइल गश्ती से भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश है.
ट्रक, हाइवा, मिक्सर डंपर और निर्माण सामग्री ढोने वाले भारी वाहनों के शहर के प्रमुख आंतरिक मार्गों में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है. डाकबंगला चौराहे से कोतवाली, भट्टाचार्या चौराहा, इनकम टैक्स गोलंबर और अशोक राजपथ की ओर जाने वाले मार्गों पर भारी वाहनों के परिचालन को विजयादशमी तक रोक दी गई है.
दानापुर, खगौल और बाइपास की ओर से आने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से सीमित समय में ही भारी वाहन निकल रहे हैं, ताकि पूजा पंडालों और श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच दुर्घटना की आशंका कम की जा सके.
ग्वालियर में जो हादसा हुआ इसमें ट्रैफिक लापरवाही एक बड़ा कारण निकलकर आ रही है. इसलिए पुलिस प्रशासन ऐसे हादसों को रोकने के लिए ट्रैफिक पर नजर और नियंत्रण बनाए हुए हैं.
पूजा पंडालों के भीतर आपातकालीन निकास द्वार, अग्निशामक यंत्र और बिजली के तारों की स्थिति की जांच पर जोर दिया जा रहा है. शहर के करीब 1,500 पूजा पंडालों में सुरक्षा मानकों की जांच तेज कर दी गई है.
इसके अलावा, गंगा घाटों पर प्रतिमा विसर्जन के दौरान डूबने और अन्य दुर्घटनाओं से बचाव के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को नावों और गोताखोरों के साथ तैनात रखने की व्यवस्था की जा रही है.
त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के घरों से निकलने और प्रमुख पूजा स्थलों पर पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है.
श्रद्धालुओं से कहा गया है कि वे भीड़ में धक्का-मुक्की न करें, निर्धारित रास्तों का इस्तेमाल करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अफवाह की सूचना पुलिस को दें.
यातायात प्रतिबंधों का पालन करना भी जरूरी है. कोलकाता और ग्वालियर की घटनाओं के बाद पटना में बढ़ाई गई सतर्कता का उद्देश्य यही है कि त्योहारों का आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो और श्रद्धालुओं की सुरक्षा में कोई चूक न हो.








