पटना- निगरानी विभाग ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में ग्रामीण कार्य विभाग में छपरा में पदस्थापित अधीक्षण अभियंता चंद्रशेखर सिंह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. एसडीओ चंद्रशेखर सिंह के चार ठिकानों पर निगरानी विभाग ने दबिश दी है.
छपरा में गुणवत्ता परीक्षण से जुड़े कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर सिंह के खिलाफ करीब 1.10 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है. गुरुवार, 15 अक्टूबर को निगरानी विभाग की टीम उनके चार ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चला रही है.
इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए पटना विजिलेंस के सीनियर डीएसपी गौतम शरण ओमी ने बताया कि चंद्रशेखर सिंह के विरुद्ध निगरानी थाना में आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है. इसी मामले के आधार पर उनके ठिकाने पर छापेमारी की जा रही है.
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उन्होंने बताया कि चंद्रशेखर सिंह ग्रामीण कार्य विभाग में अधीक्षण अभियंता के पद पर कार्यरत हैं और वर्तमान में छपरा में पदस्थापित हैं. उनके कटिहार स्थित पैतृक आवास पर जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है.
टीम इन दस्तावेजों के आधार पर मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है. छापेमारी के दौरान अब तक जमीन की खरीद-बिक्री से संबंधित कई डीड बरामद किए गए हैं.
निगरानी विभाग की टीम एसडीओ चंद्रशेखर सिंह से संबंधित चार स्थानों पर तलाशी ले रही है. इनमें छपरा स्थित उनका कार्यालय, पटना के सरयुग वमिका अपार्टमेंट का फ्लैट नंबर 103, कटिहार नगर के लोहिया नगर स्थित उनका आवासीय मकान और पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के फनसीदेवा थाना क्षेत्र स्थित एक ठिकाना शामिल है. तलाशी के दौरान टीम उनकी संपत्ति, वित्तीय लेनदेन और आय के स्रोतों से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है.
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जांच के दौरान पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के फनसीदेवा थाना क्षेत्र में उनकी पत्नी श्वेता कुमारी के नाम पर खरीदी गई 92 डिसमिल जमीन का पता चला है.
यह जमीन वर्ष 2021 में खरीदी गई थी. इसका क्षेत्रफल लगभग 31 कट्ठा बताया गया है. निगरानी विभाग के अनुसार, संबंधित जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट स्थित है और उसका बाजार मूल्य करोड़ों रुपये होने की जानकारी मिली है. हालांकि, जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य का सत्यापन अभी किया जाना है.
निगरानी विभाग की जांच में यह भी सामने आया है कि उक्त जमीन का उल्लेख चंद्रशेखर सिंह की वर्ष 2025-26 की विभागीय परिसंपत्ति विवरणी में नहीं किया गया है. ऐसे में जमीन की खरीद के दस्तावेज, क्रय मूल्य, वित्तीय स्रोत और परिसंपत्ति विवरणी में इसे शामिल नहीं करने के कारणों की जांच की जा रही है.
फिलहाल विजिलेंस की टीम लगातार तलाशी अभियान चला रही है. अधिकारियों के मुताबिक, छापेमारी पूरी होने के बाद ही बरामद सोने, नकदी और अन्य दस्तावेजों का पूरा विवरण स्पष्ट हो सकेगा. जांच के दौरान संपत्ति से जुड़े और कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं, इस पर भी नजर बनी हुई है.








