डेस्क- राहुल गांधी शनिवार को प्रयागराज पहुंचे. यहां उन्होंने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों से संवाद किया.
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने शिक्षा, बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं, युवाओं की क्षमता और डेटा की ताकत जैसे मुद्दों को उठाया. उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर भी निशाना साधा.
राहुल गांधी ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि युवाओं के दर्द को समझना जरूरी है. उनके मुताबिक आज युवाओं के पास क्षमता और ऊर्जा है, लेकिन व्यवस्था उनके सामने बाधा बन रही है.
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उन्होंने युवाओं के डेटा को भी देश की बड़ी पूंजी बताया. राहुल गांधी ने कहा कि 21वीं सदी में किसी देश की ताकत सिर्फ संसाधनों से नहीं, बल्कि उसके युवाओं और डेटा से भी तय होती है.
छात्रों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने युवाओं को भारत की शक्ति और शान बताया. उन्होंने कहा कि वह सिर्फ कार्यक्रम में मौजूद भीड़ की बात नहीं कर रहे, बल्कि देश के हर युवा और नागरिक की क्षमता की बात कर रहे हैं.
उन्होंने युवाओं की इंटेलिजेंस, इमेजिनेशन और कैपेसिटी का जिक्र करते हुए कहा कि यदि व्यवस्था उनकी क्षमता को रोकती नहीं है, तो यही युवा देश का भविष्य तय करेंगे.
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राहुल गांधी ने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं के पास क्षमता होने के बावजूद सिस्टम ने उन्हें एक तरह के चक्रव्यूह में फंसा रखा है. उन्होंने दावा किया कि रोजगार के मोर्चे पर स्थिति गंभीर है.
कार्यक्रम में राहुल गांधी ने शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ते अंतर को भी मुद्दा बनाया. उनका कहना था कि केवल डिग्री या सर्टिफिकेट हासिल कर लेना पर्याप्त नहीं है, यदि उसके बाद रोजगार का रास्ता नहीं खुलता.
युवाओं की इसी परेशानी को सामने रखते हुए उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के अवसरों को लेकर सरकार से सवाल किए. कार्यक्रम की मुख्य थीम भी युवाओं के भविष्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों पर केंद्रित रही.
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया रील्स को लेकर भी युवाओं को आगाह किया. उन्होंने इंस्टाग्राम और फेसबुक रील्स को ‘21वीं सदी का नशा’ बताया. उन्होंने कहा कि पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के बावजूद रोजगार नहीं मिलने की स्थिति युवाओं को दूसरे तरह के काम करने के लिए मजबूर कर रही है.








