समस्तीपुर- समस्तीपुर में स्कूल की 3 छात्राओं की पेड़ में दबने से मौत हो गयी है। मध्याह्नन भोजन करने के बाद तीनों बच्चियां चापाकल पर पानी पीने के लिए गई हुई थी।
तभी चापाकल के पास 5 साल से सुखा हुआ बरगद का पेड़ अचानक उन बच्चियों पर गिर पड़ा और पेड़ के नीचे दबने से तीनों की मौत हो गयी। इस घटना से परिजनों के बीच कोहराम मचा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना के खास टभका दक्षिण पंचायत के वार्ड 9 स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय चकविदौलिया की है। पेड़ की चपेट में आने से पायल कुमारी और सपना कुमारी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल गुलनाज खातून को इलाज के लिए बेगूसराय के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
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विद्यालय के प्रधानाध्यापक मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि बरगद का पेड़ करीब 4-5 वर्षों से सूखा था। इसे कटवाने के लिए कई बार पेड़ के मालिक से कहा गया था, लेकिन आपसी विवाद के कारण पेड़ नहीं कट सका।
गुरुवार को अचानक यह विशाल पेड़ विद्यालय की छत पर जा गिरा। उन्होंने बताया कि एमडीएम के बाद बच्चे कक्षा में चले गए थे। तीनों छात्राएं चापाकल के पास गई थीं।
एक पानी पी रही थी, दूसरी चापाकल चला रही थी, जबकि तीसरी शौचालय की ओर गई थी। इसी दौरान तेज आवाज के साथ पेड़ गिर गया और तीनों छात्राएं इसकी चपेट में आ गईं।
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विद्यालय परिसर में प्राथमिक विद्यालय, मध्य विद्यालय, प्राथमिक संस्कृत विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र संचालित होते हैं। घटना के समय परिसर में करीब 300 बच्चे मौजूद थे। प्रधानाध्यापक ने बताया कि यदि पेड़ एमडीएम के दौरान गिरता तो बड़ी संख्या में बच्चे इसकी चपेट में आ सकते थे।
घटना की सूचना पर रोसड़ा एसडीओ पूजा कुमारी, एसडीपीओ संजय कुमार सिन्हा, बीडीओ सुनील कुमार, सीओ चंद्रशेखर, थानाध्यक्ष सुनील कुमार झा समेत अन्य पदाधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया।
बीडीओ सुनील कुमार ने बताया कि दोनों मृत छात्राओं के परिजनों को तत्काल 20-20 हजार रुपए की सहायता राशि दे दी गई है। तीसरे वाले को भी दिया जाएगा। थानाध्यक्ष सुनील कुमार झा ने बताया कि दोनों बच्ची की शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
तीन छात्राओं की मौत की खबर से उनके परिवारों में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। विद्यालय में भी मातम पसरा है। हादसे के बाद ग्रामीणों में विद्यालय परिसर में मौजूद अन्य पेड़ों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।








