रांची- झारखंड के स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति एवं आपदा प्रबंधन मंत्री और जामताड़ा विधायक डॉ. इरफान अंसारी ने राज्य में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की है.
उन्होंने आज जामताड़ा से एक वीडियो क्लिप जारी कर कहा कि एसआईआर के नाम पर राज्य के गरीब, आदिवासी, दलित, मुस्लिम, मूलवासी और आम लोगों को परेशान किया जा रहा है. राज्य की बड़ी आबादी अपना काम-धंधा छोड़कर कागजों और दस्तावेजों के लिए भटक रही है और दहशत में जी रही है.
डॉ. अंसारी ने स्पष्ट किया कि जिस प्रक्रिया में इतनी बड़ी मात्रा में दस्तावेज, फॉर्म, सत्यापन और कागजी कार्रवाई कराई जा रही है, वह आम गरीब आदमी के लिए आसान नहीं है.
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सरकार और चुनाव आयोग को जनता की इस परेशानी को समझना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा, “झारखंड में एसआईआर किसी भी कीमत पर नहीं चलेगा. इसे तत्काल बंद करना होगा. अगर इसे नहीं रोका गया तो हम लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे.”
स्वास्थ्य मंत्री ने हाल में मीडिया में आई रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कई बार गहरी आपत्ति दर्ज की थी.
रिपोर्ट के अनुसार ये आपत्तियां मतदाता नाम जोड़ने, नाम हटाने, फॉर्म-6 और चुनावी डेटा से जुड़े मामलों पर थीं. उन्होंने सवाल किया, “आखिर दो चुनाव आयुक्तों ने जो सुझाव और आपत्तियां दीं, उन्हें क्यों नहीं माना गया? अगर आयोग के अंदर ही गंभीर सवाल उठ रहे थे, तो जनता को इसकी पूरी जानकारी क्यों नहीं दी गई?”
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डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संवैधानिक संस्था है. अगर इसकी निष्पक्षता पर जनता के मन में सवाल पैदा हो रहे हैं तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है.
उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर में साफ देखा जा रहा है कि भाजपा को मदद पहुंचाने के लिए यह प्रक्रिया चलाई जा रही है. ऐसे में भाजपा का असली चेहरा जनता के सामने आ गया है.
उन्होंने कहा कि बिहार और अन्य राज्यों में एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने के विवाद का भी उन्होंने जिक्र किया. चुनाव के बाद अगर नाम दोबारा जोड़े जा रहे हैं तो सवाल उठता है कि पहले नाम हटाने की जरूरत क्यों पड़ी और इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य क्या था.
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करना है तो चुनाव आयोग को जनता के विश्वास के साथ चलना होगा, किसी राजनीतिक दल के इशारे पर नहीं.








