डेस्क- जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न के चर्चित मामले में आज अहम फैसला सुनाते हुए आसाराम की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है.
जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने करीब एक महीने पहले सुरक्षित रखे गए निर्णय को सुनाते हुए स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट का फैसला सही था और इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है. हालांकि, मामले में सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया.
फिलहाल अंतरिम जमानत पर चल रहे आसाराम को अब कोर्ट के आदेश के अनुसार सरेंडर करना होगा. हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई 16 फरवरी से 20 अप्रैल 2026 तक लगातार हुई, जिसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था.
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बचाव पक्ष ने दलील दी कि मामला मनगढ़ंत है और पीड़िता व उसके परिजनों के बयानों में विरोधाभास हैं. साथ ही कॉल रिकॉर्ड जैसे तकनीकी साक्ष्यों की कमी का हवाला भी दिया गया.
इसी बीच, जोधपुर की बेंच ने उन्हें गैंगरेप और आपराधिक साजिश के आरोपों से बरी करके आंशिक राहत दी. पीठ ने कहा कि गैंगरेप और आपराधिक साजिश से संबंधित आरोपों को साबित करने के लिए रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत पर्याप्त नहीं हैं. गौरतलब है कि आसाराम अक्टूबर 2025 से चिकित्सा कारणों से अंतरिम जमानत पर बाहर हैं.
यह मामला अगस्त 2013 का है, जब जोधपुर के आश्रम में एक नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा था. लंबी सुनवाई के बाद 25 अप्रैल 2018 को विशेष पॉक्सो कोर्ट ने आसाराम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
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