पटना- बिहार विधानसभा चुनाव की तस्वीर अब साफ हो गई है. एनडीए की प्रचंड बहुमत से सरकार बनने जा रही है. इस चुनाव में तेजस्वी यादव के साथ-साथ प्रशांत किशोर की भी सियासत दांव पर थी. जो परिणाम आए हैं, उससे प्रशांत के सपने टूट गए. उनकी पार्टी जन सुराज का खाता भी नहीं खुला.
इसके साथ ही ये भी सवाल उठने लगे हैं कि नीतीश कुमार पर भविष्यवाणी करने वाले पीके क्या राजनीति छोड़ देंगे? उन्होंने खुद कहा था कि अगर जेडीयू को 25 से ज्यादा सीट आई तो वह संन्यास ले लेंगे.
प्रशांत किशोर ने विधानसभा चुनाव के दौरान कई बार दावा किया था कि बिहार में इस बार व्यवस्था का परिवर्तन होगा और जन सुराज पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी. उन्होंने कहा था कि यदि 120–130 या उससे कम सीटें नहीं मिलतीं तो यह उनकी हार होगी लेकिन उनकी पार्टी जीरो पर आउट हो गई.
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प्रशांत किशोर ने शुरू से ही यह घोषणा कर रखी थी कि वह बिहार की सभी 243 सीटों पर अपना उम्मीदवार खड़ा करेंगे. अपने दावे के मुताबिक सभी सीटों पर जन सुराज ने उम्मीदवारों का ऐलान भी किया. हालांकि दानापुर विधानसभा क्षेत्र से उनके प्रत्याशी ने नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया.
इसके अलावे कई सीटों पर उनके उम्मीदवारों ने पार्टी की सहमति के बगैर ही नामांकन वापस लेकर एनडीए को समर्थन कर दिया. बता दें प्रशांत किशोर खुद चुनावी उम्मीदवार नहीं बने. उन्होंने कहा कि वे सिर्फ संगठन का काम करेंगे.
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