पटना- पटना के महेंद्रू इलाके में एक रिटायर्ड फौजी को साइबर ठगों ने 10 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर 3.30 लाख रुपये की ठग लिया। ठगों ने करीब 10 दिनों तक उन्हें डर और मानसिक दबाव में रखा।
उन्होंने ठगी गई रकम अपनी भतीजी की शादी के लिए जमा की थी। घटना से आहत होकर बुजुर्ग ने आत्महत्या का प्रयास भी किया। डर के कारण वे 17 दिनों तक घर में रहे, जिसके बाद उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
ठगी की शुरुआत तब हुई जब रिटायर्ड फौजी के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को बैंक अधिकारी बताया और कहा कि दिल्ली के चांदनी चौक स्थित आईसीआईसीआई बैंक शाखा में उनके नाम पर एक खाता है।
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जालसाज ने दावा किया कि इस खाते में 6 करोड़ 80 लाख रुपये की संदिग्ध राशि जमा है। जब फौजी ने दिल्ली में किसी खाते से इनकार किया, तो ठगों ने अपनी अगली चाल चली।
पीड़ित के इनकार के तुरंत बाद उन्हें दोबारा फोन आया। इस बार कॉल करने वाले ने खुद को पुलिसकर्मी बताया और कहा कि जिस व्यक्ति ने वह मोटी रकम जमा कराई थी, उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
फौजी पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने अपना बैंक खाता अपराधियों को बेचा है और उन पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाएगा। ठगों ने इसी मानसिक दबाव का फायदा उठाया और उन्हें डरा-धमकाकर लगभग 10 दिनों तक फोन पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा।
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फौजी को पूरी तरह अपने चंगुल में कसने के लिए अपराधियों ने बेहद शातिर तरीका अपनाया। उन्होंने पीड़ित के घर की तस्वीरें खींचकर उनके मोबाइल पर भेजी, जिससे पीड़ित को लगा कि वे हर वक्त पुलिस की निगरानी में हैं।
इसके बाद अपराधियों ने पुलिस की वर्दी पहनकर वीडियो काल किया और खुद को बड़े पुलिस अधिकारी के रूप में पेश किया। खौफ का माहौल यहीं खत्म नहीं हुआ, जालसाजों ने एक संदिग्ध व्यक्ति को पीड़ित के घर पर भी भेजा।
इससे बुजुर्ग फौजी को पूरा विश्वास हो गया कि वे वाकई किसी बड़ी कानूनी मुसीबत में घिर चुके हैं। जालसाजों के चंगुल में फंसे रिटायर्ड फौजी ने खुद को पाक-साफ साबित करने और मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की।
ठगों के दबाव में आकर बुजुर्ग फौजी ने अपने एसबीआई बैंक खाते से आरटीजीएस के जरिये 3.30 लाख रुपये अपराधियों के बताये खाते में भेज दिये। बहरहाल, मामले की शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।








