डेस्क- सरकार ने गुरुवार देर रात महिलाओं को संसद में 33% आरक्षण देने वाला ‘महिला आरक्षण अधिनियम-2023’ लागू कर दिया। नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह कानून 16 अप्रैल 2026 से लागू हो गया है। इसे सितंबर 2023 में संसद के विशेष सत्र के दौरान पारित किया गया था।
विपक्ष का आरोप है कि जब संसद में महिला आरक्षण संशोधन अधिनियम पर चर्चा हो रही है, तो कानून को इतनी जल्दी क्यों लागू किया गया। हालांकि नोटिफिकेशन में साफ किया गया है कि सरकार को कानून लागू होने की तारीख तय करने का अधिकार है।
राहुल गांधी दोपहर 3 बजे लोकसभा मे बोलेंगे, फिर अमित शाह जवाब देंगे। बिलों पर शाम 4 बजे वोटिंग होगी। इस बीच विपक्ष की संसद परिसर में बैठक हो रही है। इसमें खड़गे, राहुल समेत कई नेता मौजूद हैं।
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महिला आरक्षण बिल पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, BJP को समझना मुश्किल है। जब लोगों से कहा गया था कि SIR आएगा तो वे NRC कर रहे थे। अब, महिला आरक्षण की आड़ में वे परिसीमन करके अपनी पसंद की लोकसभा बनाना चाहते हैं ताकि उन्हें हार का सामना न करना पड़े। हम महिला आरक्षण के पक्ष में हैं। वे अपनी पसंद का निर्वाचन क्षेत्र क्यों बनाना चाहते हैं?
इधर, JMM सांसद महुआ माझी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह विशेष सत्र क्यों बुलाया गया? यह तो पहले ही घोषित हो चुका है कि महिला आरक्षण बिल लागू किया जाएगा। बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव चल रहे हैं और कई नेता यहां नहीं आ पा रहे हैं।
वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने महिला आरक्षण बिल पर कहा, हम इसे कोई राजनीतिक रंग नहीं दे रहे हैं। उनकी आदत है कि वे हर चीज को एक इवेंट बना देते हैं। महिला आरक्षण बिल तो 2023 में ही पास हो चुका था।
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अगर आप सच में महिला आरक्षण लागू करना चाहते थे, तो आपने यह शर्त क्यों लगाई कि यह नई जनगणना पर आधारित होगा? बता दें कि लोकसभा में महिला आरक्षण और सीटों के परिसीमन के लिए तीन संशोधित बिलों पर आज लोकसभा में दूसरे दिन चर्चा जारी है। पहले दिन 13 घंटे चर्चा हुई।








