डेस्क- पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा की संदिग्ध हालत में मौत की गुत्थी अभी तक सुलझी नहीं है। मामले में CBI की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
POCSO कोर्ट की फटकार के बाद एजेंसी ने केस के जांच अधिकारी (IO) को बदल दिया है। इसी क्रम में शनिवार को CBI ने छात्रा के मामा को पूछताछ के लिए बुलाया।
वहीं, प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के संचालक डॉक्टर सतीश को सीबीआई कार्यालय बुलाया गया, जहां करीब आधे घंटे तक डॉ. सतीश से पूछताछ की गई है।
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सीबीआई के जांच अधिकारियों ने छात्रा के मामा से लगभग 1 घंटे में 25 सवाल किए। मामा ने बताया कि, ‘CBI भी मामले की लीपापोती कर रही है। जांच अधिकारी बदले जा रहे, लेकिन किसी भी तथ्यों की जांच सही दिशा में नहीं की जा रही।’
पीड़ित पक्ष के वकील एसके पांडे ने बताया कि, मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की जा रही है। जांच के नाम पर पीड़ित परिवार को परेशान किया जा रहा है, उन्हें टॉर्चर किया जा रहा है। पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया जा रहा है कि मान लीजिए यह आत्महत्या है।’
एसके पांडे ने बताया कि, ‘सीबीआई के जांच अधिकारी भले ही चेंज हो गए हों, लेकिन जांच के नाम पर लीपापोती की जा रही है। नए जांच अधिकारी से उम्मीद है कि वह सही तथ्यों और सही दिशा में कम करें।’
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बता दें कि CBI से इस मामले की IO बनने के बाद डीएसपी विभा कुमारी अपनी टीम के साथ छात्रा के घर जहानाबाद पहुंची थीं। वहां परिजनों और ग्रामीणों ने सीबीआई टीम का विरोध किया।
उनका कहना था कि सीबीआई तीन-चार बार पूछताछ कर चुकी है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। पूछताछ के दौरान छात्रा की मां की तबीयत बिगड़ जाती है और वे बेहोश हो जाती हैं।
लगातार बदलते हालात और धीमी जांच प्रक्रिया से इस हाई-प्रोफाइल मामले में सीबीआई की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। परिजन न्याय की मांग पर अड़े हैं।








