जमशेदपुर- जमशेदपुर के साकची थाना क्षेत्र में निवेश के नाम पर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है. इस मामले में फिल्म अभिनेता गोविंदा, चंकी पांडे, मनोज तिवारी, रजा मुराद और शक्ति कपूर जैसे नामों का इस्तेमाल कर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किए जाने का आरोप लगाया गया है.
कोर्ट के आदेश पर साकची थाना में केस दर्ज किया गया है. बिष्टुपुर ईस्ट प्लांट बस्ती पंजाबी लाइन निवासी जसपाल सिंह और टेल्को कॉलोनी क्रॉस रोड-4 निवासी कुलदीप सिंह ने साकची थाना में शिकायत दर्ज कराई है.
शिकायत में बताया गया है कि मैक्सीजन टच प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी में उनसे कुल आठ लाख रुपये का निवेश कराया गया. कंपनी ने ज्यादा मुनाफा देने का लालच देकर यह रकम जमा करवाई थी.
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शिकायतकर्ताओं के अनुसार, दिसंबर 2021 से फरवरी 2022 के बीच उन्होंने कंपनी में अलग-अलग किश्तों में आठ लाख रुपये जमा किए थे. कंपनी के प्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया था कि तय समय के बाद रकम के साथ अच्छा रिटर्न दिया जाएगा. लेकिन समय बीतने के बावजूद न तो मुनाफा मिला और न ही मूल राशि वापस की गई.
पीड़ितों ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि कंपनी के प्रचार-प्रसार में बॉलीवुड के चर्चित कलाकारों के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया था.
प्रचार सामग्री में अभिनेता गोविंदा, चंकी पांडे, मनोज तिवारी, रजा मुराद और शक्ति कपूर का नाम सामने आने के बाद निवेशकों को कंपनी पर भरोसा हो गया. इसी भरोसे के आधार पर उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई कंपनी में लगा दी.
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मामले में मैक्सीजन टच प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के डायरेक्टर चंद्रभूषण सिंह, उनकी पत्नी सह-डायरेक्टर प्रियंका सिंह और जमशेदपुर शाखा के प्रतिनिधि सूर्य नारायण पात्रो को आरोपी बनाया गया है. आरोप है कि कंपनी ने योजनाबद्ध तरीके से लोगों को ठगने का काम किया और करोड़ों रुपये की राशि निवेश के नाम पर इकट्ठा की.
इस मामले में पुलिस ने पहले ही बड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी के डायरेक्टर चंद्रभूषण सिंह और उनकी पत्नी प्रियंका सिंह को गिरफ्तार कर लिया है. दोनों को बीते दिनों धनबाद में राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन से गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तारी के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और फिलहाल वे जेल में हैं.
साकची थाना पुलिस ने कोर्ट के आदेश के बाद केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस कंपनी के दस्तावेजों, बैंक खातों और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है. साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कंपनी ने कितने लोगों से कितनी राशि जुटाई और पैसा कहां खर्च किया गया.








