डेस्क- केंद्र सरकार ने शुक्रवार यानी 21 नवंबर को एक ऐतिहासिक फैसला लिया है. सरकार ने चार नए श्रम कानूनों (Labour Codes) को लागू कर दिया है. ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में ये एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का मकसद एक सुदृढ़ मजदूर-ढांचा तैयार करना है, जो न सिर्फ श्रमिकों की सुरक्षा बढ़ाए, बल्कि उद्योगों के लिए भी प्रतिस्पर्धात्मक माहौल बनाए.
दरअसल, सरकार ने पुराने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को खत्म कर उन्हें चार कोड में बदल दिया है. लेबर मिनिस्ट्री ने बताया है कि नए कोडों के जरिए सभी श्रमिकों को खासकर अनौपचारिक सेक्टर, गिग वर्कर्स, प्रवासी मजदूरों और महिलाओं के लिए बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य-सुरक्षा की गारंटी दी जाएगी.
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मुख्य बदलावों में शामिल हैं:
1. नियुक्ति पत्र- अब सभी श्रमिकों को नौकरी शुरू करने के समय नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा, जिससे रोजगार और शर्तों की पारदर्शिता बढ़ेगी.
2. मिनिमम वेतन- देशभर में न्यूनतम वेतन लागू होगा, ताकि कोई भी सेलरी इतना कम न हो कि जीवन यापन मुश्किल हो.
3. समय पर वेतन भुगतान- नियोक्ताओं को कर्मचारियों को समय पर भुगतान करना कानूनी रूप से जरूरी होगा.
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4. स्वास्थ्य और सुरक्षा- 40 वर्ष से ऊपर के सभी श्रमिकों के लिए निःशुल्क वार्षिक हेल्थ चेकअप अनिवार्य होगा. इसके अलावा एक राष्ट्रीय OSH बोर्ड के ज़रिए उद्योगों में सुरक्षा मानकों को एकरूप किया जाएगा.
5. महिलाओं के लिए बराबरी: महिलाएं अब रात की शिफ्टों में काम कर सकेंगी, पहले कई सेक्टरों में यह इजाजत नहीं थी, लेकिन इसके लिए नियोक्ता को सुरक्षा उपाय और उनकी सहमति सुनिश्चित करनी होगी.
6. अनौपचारिक श्रमिकों को सुरक्षा: गिग वर्कर्स और प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स को पहली बार कानूनी पहचान मिलेगी. उन्हें PF, बीमा, पेंशन जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ मिल सकेंगे, और प्लेटफार्म कंपनियों को उनके लिए योगदान करना होगा.
7. कानूनी अनुपालन आसान: अब कई रजिस्ट्रेशन और रिपोर्टिंग की जगह सिंगल लाइसेंस, सिंगल रिटर्न मॉडल आएगा, जिससे कंपनियों का कम्प्लायंस बोझ घटेगा.








