पटना- बिहार सरकार ने बड़ी पहल की है. अब एआई के माध्यम से कैथी लिपि में लिखे पुराने अभिलेखों का देवनागरी में लिप्यंतरण किया जाएगा. यह पहल न केवल भूमि सर्वेक्षण को गति देगी, बल्कि ऐतिहासिक अभिलेखों को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के साथ एमओयू साइन किया है. इस समझौते पर मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा की मौजूदगी में डीआईबीडी के सीईओ अमिताभ नाग और विभाग के सचिव जय सिंह ने हस्ताक्षर किए.
दरअसल, पुराने कैडस्ट्रल और पुनरीक्षण सर्वे अभिलेखों का अधिकांश हिस्सा कैथी लिपि में है, जिसे पढ़ने में विशेषज्ञता की कमी के कारण भूमि सुधार विभाग को काफी परेसानी का सामना करना पड़ रहा था. रिटायर्ड कर्मचारियों पर निर्भरता और विशेषज्ञों की कमी ने इस प्रक्रिया को कठिन बना दिया था.
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मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने कहा कि यह तकनीकी समाधान न केवल राजस्व विभाग, बल्कि शिक्षा, समाज कल्याण और पर्यटन जैसे अन्य विभागों के लिए भी कारगर होगा. उन्होंने पाली लिपि को हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद करने पर भी जोड़ दिया और बिहार स्पेसिफिक हैकथॉन आयोजित करने का निर्देश दिया.
डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के सीईओ अमिताभ नाग ने इस पहल को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि भाषा किसी भी कार्य में बाधा नहीं बननी चाहिए. यह तकनीक न केवल ऐतिहासिक ज्ञान को संरक्षित करेगी, बल्कि इसे आम लोगों के लिए भी आसान बनाएगी. बिहार सरकार का यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक हो सकता है.
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