डेस्क- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में नाबालिगों से गैंगरेप की 3 घटनाओं पर सुनवाई करते हुए कहा, जब तक अपराधी के मन में मौत का डर नहीं होगा, तब तक ऐसे अपराध नहीं रुकेंगे।” “
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि केवल चीजों को कागज पर लिखना पर्याप्त नहीं है, सख्त कार्रवाई करनी होगी। जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सख्त होने से हिचकिचाएं नहीं।
बेंच ने कहा कि कुछ लोग अनुच्छेद 21 यानी मानव अधिकार का हवाला देकर सवाल उठाएंगे, लेकिन पुलिस को अपना कर्तव्य निभाना होगा। इसके बाद दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में 4 अगस्त से 21 सितंबर के बीच ग्रेटर नोएडा-दिल्ली बस, आस्था कुंज पार्क और स्वरूप नगर में रेप की 3 घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लिया था। इस मामले में पहली सुनवाई 28 सितंबर को हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि सार्वजनिक जगहों को खराब रोशनी, निगरानी की कमी और पेट्रोलिंग की कमी जैसी वजहों से ‘हाई रिस्क जोन’ नहीं बनने दिया जा सकता। सिर्फ संवेदना जताना समाधान नहीं है, बल्कि अपराध रोकने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
आस्था कुंज पार्क की घटना का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि LSR कॉलेज की छात्राओं ने पहले भी यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधार नहीं किए गए।
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