रांची- हजारीबाग के डिटेंशन सेंटर में रह रही एक बांग्लादेशी महिला से दुष्कर्म मामले में तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है. तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.
जिला विधिक सेवा प्राधिकार यानी DALSA, हजारीबाग की रिपोर्ट पेश होने के बाद जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ के सामने राज्य सरकार की ओर से यह जानकारी दी गई है.
खंडपीठ ने पीड़िता को अबतक डिपोर्ट नहीं किए जाने पर केंद्र से जवाब तलब किया है. साथ ही पीड़िता की सुरक्षा और जरुरी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी.
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दरअसल, डिटेंशन सेंटर में महिला पर हो रहे अत्याचार से जुड़े मामले को एक NGO ने उठाया है. बताया गया कि एक विदेशी महिला को सजा की अवधि पूरी होने के बावजूद डिटेंशन सेंटर में रखा गया था और इसी दौरान उसके साथ कथित तौर पर यौन शोषण हुआ.
महिला ने सारी सजा 2021 में ही पूरी कर ली थी. फिर भी उसे कभी डिटेंशन सेंटर तो कभी जेल में रखा गया. खास बात है कि महिला अनाथ है. अधिवक्ता के मुताबिक जब उन्होंने पीड़िता से मिलकर बात की तो ऑन रिकॉर्ड बताया कि एक पुलिस वाला शारीरिक शोषण करता है.
इसी सूचना पर कोर्ट ने झालसा सचिव को ऑनलाइन निर्देशित किया कि डालसा की टीम को डिटेंशन सेंटर भेजकर बयान रिकॉर्ड कराएं. डालसा की टीम को पीड़िता ने बताया कि उसके साथ तीन पुलिसकर्मियों ने दुष्कर्म किया है.
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राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि महिला से कथित दुष्कर्म के मामले में हजारीबाग के तीन कांस्टेबल रंजीत महतो, रेनू बेंजामिन और वारिस कच्छप के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. तीनों को निलंबित भी कर दिया गया है. कोर्ट ने प्राथमिकी में आरोपियों के खिलाफ लगाई गई धाराओं को लेकर भी सवाल किया.
सुनवाई के दौरान झारखंड की गृह सचिव वंदना दादर कोर्ट में उपस्थित थीं. अधिवक्ता अंकित अपूर्व के मुताबिक, गृह सचिव ने कोर्ट को बताया कि हजारीबाग का डिटेंशन सेंटर उनके विभाग के अधीन नहीं, बल्कि जिला पुलिस के अधीन आता है.
इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि पुलिस तो गृह विभाग के अधीन आती है, ऐसे में डिटेंशन सेंटर में रहने वाली महिला की सुरक्षा और वहां होने वाली किसी घटना के लिए सरकार की जिम्मेदारी से कैसे इनकार किया जा सकता है.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि महिला को वर्ष 2021 में विदेशी घोषित किए जाने के बाद तत्काल डिपोर्ट क्यों नहीं किया गया. कोर्ट ने पूछा कि जब महिला को विदेशी अधिनियम के तहत वर्ष 2021 में तीन साल की सजा पूरी हो गई थी, तो इसके बाद उसे बांग्लादेश क्यों नहीं भेजा गया और हजारीबाग के डिटेंशन सेंटर में क्यों रखा गया?
इस केस के अधिवक्ता अंकित अपूर्व के मुताबिक राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इसको लेकर मिनिस्ट्री ऑफ होम को डिपोर्ट करने को लेकर पत्र लिखा गया था.
लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला. इसपर केंद्र को जवाब देना है. साथ ही कोर्ट ने डिटेंशन सेंटर में महिला को रहने के दौरान आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी निर्देश राज्य सरकार को दिया है.








