रांची- प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करने की मांग वाली याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में प्रतिवादी पक्ष (मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पक्ष) द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगे जाने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई.
जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने जवाब के लिए समय मांगे जाने के अनुरोध को स्वीकार करते हुए प्रतिवादी पक्ष पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रतिवादी पक्ष तय समय-सीमा के भीतर अपना जवाब दाखिल करें. मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।
गौरतलब है कि जमीन घोटाले से जुड़े मामले में जांच के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से रांची के एससी-एसटी थाने में ईडी के तत्कालीन अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा समेत अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. इसमें अधिकारियों पर उत्पीड़न और अधिकारों के हनन का आरोप लगाया गया था.
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ईडी अधिकारियों ने इस एफआईआर और उसके आधार पर शुरू की गई कार्रवाई को रद्द कराने के लिए झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. हाईकोर्ट के पूर्व के निर्देश के तहत अधिकारियों के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर पहले से ही रोक जारी है.
इसी मामले में अदालत ने प्रतिवादी पक्ष से जवाब मांगा था, जिसमें देरी होने पर अदालत ने सख्ती दिखाते हुए हर्जाना लगाया है. अब मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी. हाईकोर्ट ने झारखंड स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी में जुर्माने की राशि जमा करने का निर्देश दिया है.
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