रांची- झारखंड के संथाल परगना प्रमंडल में आदिवासियों की घटती आबादी चिंता का विषय है. अगर इस मुद्दे पर खास ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में स्थानीय आदिवासियों और मूल निवासियों के लिए खतरा पैदा हो सकता है.
ऐसा इसलिए है क्योंकि दूसरे लोग यहां बसने के लिए आदिवासी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं और सरकारी योजनाओं पर अपना दावा जता रहे हैं, जिससे स्थानीय आबादी उन फायदों से वंचित हो रही है, जिनके वे हकदार हैं. ये बातें विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहीं.
उन्होंने कहा कि अगर 2001 से अब तक विधानसभा क्षेत्रों, खासकर पाकुड़ और साहिबगंज के आंकड़ों को देखें, तो आदिवासी आबादी में काफी कमी आई है.
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उन्होंने बताया कि संथाल परगना इलाके में पाकुड़ और साहिबगंज भौगोलिक रूप से बांग्लादेश के करीब हैं, पश्चिम बंगाल के रास्ते लोग इन इलाकों में आते हैं, इसके अलावा देश के दूसरे हिस्सों से भी लोग आकर यहां बस गए हैं.
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि संथाल परगना में भारत निर्वाचन आयोग विशेष ध्यान दे, हम इसकी मांग करते हैं. भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जबतक यहां अवैध रूप से बसे लोगों की खातियान की जांच नहीं होती, तबतक इसकी पहचान करना संभव नहीं है.
भाजपा नेता ने कहा कि चल रहे एसआईआर में जैसे तैसे नाम चढ़ाकर घुसपैठिये सोच रहे है कि हम बच गये लेकिन ऐसा नहीं होगा क्योंकि केंद्र से एक विशेष जांच टीम का गठन हुआ है और इसकी भी जांच होगी.
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