रांची- भगवान शिव की आराधना को समर्पित पवित्र सावन मास और श्रावणी मेले की शुरुआत आज से हो गई है. सावन के पहले ही दिन राजधानी रांची पूरी तरह शिवमय नजर आई.
शहर के प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर, सुरेश्वर महादेव मंदिर समेत विभिन्न शिवालयों में सुबह तड़के से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं. हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा. श्रद्धालु हाथों में गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और पूजा सामग्री लेकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते नजर आए.
रांची के ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर में इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं. मंदिर की सीढ़ियों की मरम्मत कराई गई है और आने-जाने के लिए नए पेवर ब्लॉक मार्ग बनाए गए हैं.
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श्रद्धालुओं के चढ़ने और उतरने के लिए अलग-अलग सीढ़ियों की व्यवस्था की गई है, जिससे भीड़ का दबाव कम हो और दर्शन सुचारु रूप से हो सके. महिलाओं और पुरुषों के लिए भी अलग प्रवेश एवं निकास मार्ग निर्धारित किए गए हैं. जिसका लाभ श्रद्धालुओं को मिल रहा है.
मंदिर समिति ने जलाभिषेक के लिए इस बार भी अरघा सिस्टम की व्यवस्था की है. हालांकि पहली सोमवारी से अरघा सिस्टम से जलार्पण होगा. इसके माध्यम से श्रद्धालु बिना अधिक भीड़ के आसानी से बाबा भोलेनाथ पर जल अर्पित करेंगे.
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क है. मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में 60 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है. बड़ी संख्या में पुलिस बल, दंडाधिकारी और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है, ताकि दर्शन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो.
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सुबह 3:30 बजे सरकारी पूजा के बाद मंदिर के पट सुबह 4:00 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए. श्रद्धालु सुबह 4:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक तथा दोपहर 2:00 बजे से रात 9:00 बजे तक दर्शन और जलाभिषेक कर सकेंगे.
नगर निगम द्वारा पहाड़ी मंदिर के आसपास किए गए अतिक्रमण हटाने का भी लाभ श्रद्धालुओं को मिल रहा है. मंदिर क्षेत्र पहले की तुलना में अधिक खुला और व्यवस्थित दिखाई दे रहा है, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही आसान हुई है.
सावन महीने का विशेष महत्व सोमवार के व्रत और जलाभिषेक को लेकर माना जाता है. इस वर्ष सावन की पहली सोमवारी 3 अगस्त को पड़ेगी. इसे लेकर प्रशासन और मंदिर समिति ने अभी से व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं.








