पटना- बिहार पुलिस ने सोशल मीडिया पर हथियारों का प्रदर्शन करने और पुलिस टीम पर हमला करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है.
पुलिस मुख्यालय के अनुसार 1 मई 2026 से 14 जुलाई 2026 तक सोशल मीडिया पर हथियार प्रदर्शन के मामलों में 102 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जबकि 130 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. इस दौरान 40 हथियार भी जब्त किए गए हैं.
बिहार पुलिस मुख्यालय ने बताया कि राज्य के सभी जिलों में सोशल मीडिया सेल सक्रिय है. इसके अलावे मुख्यालय स्तर पर सोशल मीडिया सेंटर और साइबर क्राइम और सुरक्षा इकाई की ओर से 24 घंटे सोशल मीडिया की निगरानी की जा रही है.
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पुलिस का कहना है कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर लाइक, फॉलोअर्स बढ़ाने, दिखावा करने या लोगों में भय का माहौल बनाने के उद्देश्य से हथियारों का प्रदर्शन कर रहे हैं. ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ लगातार कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के मुताबिक हथियार प्रदर्शन के मामलों में सबसे अधिक 17 प्राथमिकी पटना जिले में दर्ज की गई हैं. यहां 29 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और 9 हथियार बरामद किए गए हैं. इसके अलावे नवगछिया और गोपालगंज में 9-9 मामले दर्ज किए गए.
पुलिस मुख्यालय ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से धार्मिक या जातीय टिप्पणी कर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने, किसी व्यक्ति के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले पोस्ट और वीडियो साझा करने वालों पर भी लगातार कार्रवाई की जा रही है.
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बिहार पुलिस मुख्यालय ने पुलिसकर्मियों पर हमला करने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी विशेष अभियान चलाया. 5 जुलाई से 10 जुलाई 2026 तक सभी जिलों में पुलिस अधीक्षकों और वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में चलाए गए अभियान के दौरान पुलिस पर हमला करने के मामलों में 348 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.
नवादा जिले के नारदीगंज थाना क्षेत्र में अवैध खनन और पुलिस पर हमले के मामले में दर्ज कांड संख्या-158/26 में 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. वहीं बांका जिले के कटोरिया थाना क्षेत्र में पुलिस पर हमला मामले में दर्ज कांड संख्या-137/26 में 23 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया गया.
वहीं, पुलिस ने युवाओं और उनके अभिभावकों से अपील की है कि वे कानून हाथ में लेने से बचें और किसी के बहकावे में आकर अपराध का हिस्सा न बनें.
पुलिस मुख्यालय ने कहा कि ऐसे मामलों में दर्ज प्राथमिकी का रिकॉर्ड CCTNS और NATGRID पर अपलोड किया जाता है, जिससे भविष्य में नौकरी, प्रतियोगी परीक्षाओं, व्यवसाय या चरित्र सत्यापन के दौरान आपराधिक इतिहास सामने आ जाता है.








