डेस्क- विदेश मंत्रालय के एक बयान के बाद से यह सवाल खड़ा हो गया है कि भारत का नागरिक कौन है. आज भारत की अधिकांश जनता के पास ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं है जो साबित करे कि वो भारत का नागरिक है क्योंकि आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट ये सब देश के अलग-अलग कानूनों के हिसाब से बने पहचान पत्र हैं लेकिन नागरिकता की पहचान नहीं.
विदेश मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता की पहचान नहीं है. अब सियासी दल फिर से सवाल उठाने लगे कि फिर भारतीयता की पहचान क्या है.
जब भारत सरकार की ओर से जारी कोई भी दस्तावेज नागरिकता का प्रमाण नहीं और भारत सरकार इस हालत में नहीं कि एनआरसी करके प्रमाण पत्र जारी कर ले तो आज भारतीयों के पास नागरिकता को प्रमाणित करने वाला डॉक्यूमेंट कौन सा है.
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चूंकि, मामला कागज दिखाने वाली सियासत से जुड़ा है तो विपक्षी सवाल भी उठा रहे हैं. ओवैसी कहते हैं कि बीजेपी की मेंबरशिप हो तभी आप भारतीय माने जाएंगे.
कांग्रेस के गौरव गोगोई कहते हैं कि कहीं ये सब बयान एनआरसी लाने की तैयारी के लिए तो नहीं दिये जा रहे. फिलहाल ऐसा मुमकिन नहीं है लेकिन फिर भी सवाल बहुत हैं.
राष्ट्रीयता की पहचान पर अब नई बहस शुरू हुई है क्योंकि पासपोर्ट को नागरिकता का दस्तावेज नहीं बताने पर उन्हें शक होने लगा है कि कहीं फिर से कागज तो नहीं मांगे जाएंगे.
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भारत के विपक्षी दलों को ये शक इसलिए है क्योंकि पिछले कुछ बरसों में जब से नागरिकता कानून बना और कागज नहीं दिखाने के नाम पर दिल्ली से लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ उसके बाद नागरिकता के दस्तावेज तलाशे जाने लगे.








