डेस्क- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 अक्तूबर को ओडिशा के दौरे पर रहेंगे। इसी दिन किसानों ने आंदोलन का ऐलान किया है। नवनिर्माण कृषक संगठन ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने और आम लोगों की कीमत पर कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए विरोध-प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
संगठन के संस्थापक अक्षय कुमार ने भुवनेश्वर में गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विरोध-प्रदर्शन की योजना की घोषणा करते हुए ओडिशा सरकार पर भी असहमति की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
रायगडा जिले में सिजीमाली खनन विवाद का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जो किसान और आदिवासी समुदाय अपनी जमीन, जंगल, पानी और खनिज संसाधनों को कॉरपोरेट हाथों में सौंपने का विरोध कर रहे हैं
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उन्हें झूठे मामलों में फंसाकर लंबे समय तक जेल में रखकर और पुलिस कार्रवाई के जरिए परेशान किया जा रहा है। उन्होंने इन घटनाओं को विकास के नाम पर विनाश करार दिया।
अक्षय कुमार ने केंद्र सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि 2020-21 में दिल्ली में हुए लंबे किसान आंदोलन के बावजूद, सरकार 23 फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की किसानों की मांग को पूरा करने में विफल रही।
उन्होंने दावा किया कि उस आंदोलन के दौरान 750 से अधिक किसानों की मौत हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों ने कृषि संकट को और गहरा कर दिया है, जिसके कारण किसान आत्महत्या करने को मजबूर हुए हैं।
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ओडिशा सरकार की स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने कक्षा एक से आठ तक की पाठ्यपुस्तकों में 1,678 गलतियां होने की बात स्वीकार की थी। लेकिन बार-बार विरोध-प्रदर्शन के बावजूद, सुधारी गई किताबें अभी तक छात्रों तक नहीं पहुंची हैं।
उन्होंने स्कूल और जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड द्वारा नैतिक जिम्मेदारी न लेने और इस्तीफा न देने पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस देरी से लगभग एक करोड़ छात्रों का शैक्षणिक भविष्य खतरे में पड़ गया है।
संगठन ने केंद्र सरकार पर मतदाता सूची के एसआईआर के जरिए मतदान के अधिकारों को कमजोर करने का भी आरोप लगाया। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया से देशभर में 13.30 करोड़ लोगों के मताधिकार पर खतरा मंडरा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों को दबाने के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास और राष्ट्रीय नेता आशुतोष रांका की हिरासत का हवाला देते हुए कहा कि यह असहमति की आवाजों को कुचलने की कोशिश है।
उन्होंने सरकार समर्थक मीडिया के जरिए लोकतांत्रिक आंदोलनों को बदनाम करने और सोशल मीडिया पर आलोचनात्मक आवाजों को दबाने की कोशिशों की भी कड़ी निंदा की।








