डेस्क- सोनिया गांधी ने गुरुवार को इंस्टाग्राम पर डेब्यू किया और अपनी आने वाली किताब के बारे में पहला पोस्ट साझा किया. उन्होंने अपनी किताब को “प्यार, कर्तव्य, नुकसान और अपनेपन की जगह खोजने की कहानी” के रूप में वर्णित किया. सोनिया गांधी ने अपनी किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ की एक प्रति हाथ में लिए हुए अपना वीडियो भी साझा किया.
उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी पोस्ट में कहा, “सभी को नमस्कार, मैं आप सभी के साथ इस पल को साझा करने के लिए वास्तव में बहुत आभारी हूं; Belonging: A Journey of Love की पहली झलक. यह प्यार, कर्तव्य, नुकसान और अपनेपन की जगह पाने की कहानी है. मैं इसे आपके साथ साझा करने के लिए उत्सुक हूं.”
वीडियो में, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष गांधी को अपनी किताब की पहली प्रति प्राप्त करते हुए और इस अवसर पर अपनी बेटी प्रियंका गांधी के साथ मिठाई खाते करते हुए देखा जा सकता है.
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सोनिया गांधी ने बताया कि किताब में बहुत सारी तस्वीरें हैं. पिछले महीने हार्पर कॉलिंस इंडिया ने कहा था कि वह 10 नवंबर को भारत में सोनिया गांधी का संस्मरण “बिलोंगिंग: ए जर्नी ऑफ लव” प्रकाशित करेगा, क्योंकि लेखक के प्रतिनिधियों और पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के बीच “गतिरोध” के बाद भारत में घरेलू प्रकाशन को लेकर बनी अनिश्चितता खत्म हो गई.
हार्पर कॉलिन्स इंडिया ने एक बयान में कहा था, “हमारे समय के सबसे प्रतीक्षित राजनीतिक संस्मरणों में से एक, ‘बिलॉन्गिंग’ प्रेम, पहचान, कर्तव्य और अपनेपन की एक नाटकीय और बेहद व्यक्तिगत कहानी है, जो भारत की यात्रा का एक दुर्लभ अंदरूनी दृष्टिकोण पेश करती है.”
सोनिया गांधी के इस संस्मरण में राजीव गांधी से उनकी शादी और अपनी सास, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से उनके परिचय के साथ-साथ भारतीय जीवन में ढलने की उनकी कोशिशों के बारे में बताया गया है, जिसमें हिंदी सीखना, साड़ी पहनना और भारतीय भोजन और संस्कृति को अपनाना शामिल है.
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इसमें गांधी परिवार के जीवन को झकझोर देने वाली तीन बड़ी त्रासदियों के बारे में बताया गया है, जिसमें संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मौत (1980), इंदिरा गांधी की हत्या (1984), और राजीव गांधी की हत्या (1991) का संक्षिप्त विवरण शामिल है.
इस संस्मरण में 2004 के चुनाव के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत के इर्द-गिर्द की राजनीतिक घटनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई है, जब सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री बनने से इनकार कर दिया था और इसके बजाय उन्होंने पार्टी और उसके गठबंधन का नेतृत्व किया, जिसने एक दशक तक भारत पर शासन किया.








