रांची- शिक्षक दिवस के मौके पर झारखंड में 10 हजार से अधिक वित्त रहित शिक्षक और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए। वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर शनिवार को राज्य के करीब 1250 अनुदानित संस्थानों के बाहर धरना-प्रदर्शन किया गया.
रांची के लोक भवन के सामने प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद मोर्चा ने जिला स्तर पर अपने-अपने संस्थानों के सामने आंदोलन का फैसला लिया.
मोर्चा का कहना है कि शिक्षक दिवस सम्मान का प्रतीक है, लेकिन राज्य के हजारों वित्त रहित शिक्षक आज भी नियमित वेतन के बजाय अनुदान के भरोसे काम करने को मजबूर हैं. इसी कारण शिक्षक दिवस पर राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया.
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मोर्चा के अनुसार, राज्यभर में करीब 1250 संस्थानों में आंदोलन हुआ, जिसमें लगभग 10 हजार शिक्षक-कर्मचारियों ने हिस्सा लिया. कई स्थानों पर छात्र-छात्राएं भी बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल हुए और अपने शिक्षकों के समर्थन में नारे लगाए.
धरने में शामिल छात्रों ने कहा कि उनके शिक्षक बिना नियमित वेतन के भी गरीब छात्रों को पढ़ा रहे हैं. छात्रों का कहना था कि बढ़ती महंगाई के दौर में यदि शिक्षकों को वेतन नहीं मिलेगा तो शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी. छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि शिक्षकों की मांगें नहीं मानी गईं तो वे भी उनके साथ सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे.
संघर्ष मोर्चा ने सरकार के समक्ष सात प्रमुख मांगें रखीं. इनमें 75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि के प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद से मंजूरी दिलाना, सेवा शर्त नियमावली बनाना, सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का लाभ सभी अनुदानित संस्थानों की छात्राओं तक पहुंचाना, झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) में कथित अनियमित नियुक्तियों पर कार्रवाई, उपाध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पद भरना तथा स्थापना अनुमति प्राप्त 158 उच्च विद्यालयों को तीन वर्ष की प्रस्वीकृति अवधि देने जैसी मांगें शामिल हैं.
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