डेस्क- नेपाल में एक बार फिर नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद 7 जिलों में बाढ़ का नया अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारियों ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं, नवलपरासी और चितवन जिलों में नदियों के किनारे बसे इलाकों के लिए चेतावनी जारी की है।
26 अगस्त को तिब्बत में ग्लेशियर टूटने के बाद नेपाल के कई इलाकों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन हुआ। इस आपदा में मौत का आंकड़ा 1 हजार के पार हो चुका है।
नेपाल में 1003 और तिब्बत में 16 लोगों की मौत हुई है। चितवन में अब तक सबसे ज्यादा 321 शव बरामद हुए हैं। जबकी 4400 से ज्यादा लोग लापता हैं।
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तिब्बत में बाढ़ और भूस्खलन के एक हफ्ते बाद भी रेस्क्यू अभियान जारी है। टीमें चीन-नेपाल सीमा तक जाने वाली आखिरी 1 किमी सड़क को दोबारा जोड़ने में जुटी हैं। तेज बहाव और लगातार बारिश के कारण राहत कार्य में दिक्कत आ रही है। प्रशासन ने नए भूस्खलन और ग्लेशियर टूटने का खतरा भी जताया है।
नेपाल सरकार ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष और प्रधानमंत्री कोष के जरिए आर्थिक सहायता जुटानी शुरू की है। सरकार के मुताबिक, सोमवार दोपहर तक नौ वाणिज्यिक बैंकों में प्रधानमंत्री राहत कोष के खातों में 5.87 अरब नेपाली रुपए यानी करीब 363.94 करोड़ भारतीय रुपए जमा हो चुके थे।
इसके अलावा हिमालयन बैंक और लक्ष्मी बैंक के खातों में लगभग 30.29 करोड़ रुपए जमा हुए हैं। कतर ने नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत सामग्री भेजी है। कतर के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, राहत सामग्री लेकर एक विमान नेपाल पहुंचा।
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इस सहायता से करीब 52 हजार लोगों को मदद मिलेगी। इसमें पानी निकालने और पंपिंग के उपकरण, लाइटिंग, खाने-पीने का सामान और टेंट शामिल हैं।
बाढ़ के बाद हैजा, मलेरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा है। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, 100 से ज्यादा बच्चे अपने माता-पिता या देखभाल करने वालों से बिछड़ गए हैं। वहीं, कम से कम 19 स्कूल भी बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए हैं।
इधर, अज्ञात शवों को सामूहिक कब्रों में दफनाया जा रहा है. बाद में पहचान हो सके, इसके लिए हर शव को एक अलग पहचान संख्या दी गई है, ताकि परिजन भविष्य में उन्हें पहचान सकें।








