पटना- पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में लंबे समय से विवाद और विरोध प्रदर्शन जारी है. बिहार की राजधानी पटना में भी बुधवार को छात्रों का उग्र प्रदर्शन देखने को मिला, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई. इस दौरान कई पुलिसकर्मी और मीडिया कर्मी घायल हो गए. इसी बीच एक बड़ी खबर सामने आई है.
दरअसल, पेपरलीक की जांच कर रही CBI ने अपनी जांच में कहा है कि परीक्षा माफिया के नाम से चर्चित संजीव कुमार उर्फ संजीव मुखिया के खिलाफ ऐसा कोई साक्ष्य ही नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि वह नीट यूजी का प्रश्नपत्र चोरी करने, उसे हल कराने या अभ्यर्थियों तक पहुंचाने की साजिश में शामिल था.
जांच एजेंसी के अनुसार, ‘विस्तृत अनुसंधान के दौरान ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला, जिससे यह सिद्ध हो सके कि संजीव मुखिया प्रश्नपत्र की चोरी, उसे हल कराने अथवा अभ्यर्थियों में वितरित करने की पूरी साजिश का हिस्सा था.’
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सीबीआई का कहना है कि उसने मामले की गहन जांच के बाद पेपर लीक की पूरी साजिश और उसमें शामिल सभी प्रमुख आरोपियों की पहचान कर ली है. साथ ही उन अभ्यर्थियों की भी पहचान की गई है, जिन्हें चोरी हुए प्रश्नपत्र का लाभ मिला था.
बताया जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने पटना स्थित विशेष सीबीआई अदालत में 45 आरोपियों के खिलाफ कई चरणों में आरोपपत्र दाखिल किया है. एजेंसी का दावा है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया गया है और जांच तार्किक निष्कर्ष तक पहुंच चुकी है.
दरअसल, 5 मई 2024 को देशभर में नीट यूजी परीक्षा आयोजित की गई थी. जिसमे पेपर लीक हुआ था और इसका मास्टर माइंड बिहार के संजीव मुखिया को माना जा रहा था.
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पुलिस, ईओयू और फिर सीबीआई ने इस मामले की जांच की. जहां सीबीआई अब संजीव मुखिया को क्लीनचीट देती नजर आ रही है. हालांकि संजीव मुखिया फिलहाल बिहार पुलिस सिपाही बहाली परीक्षा पेपर लीक मामले में न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है.








