डेस्क- त्रिपुरा के डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DGP) और IPS अधिकारी अनुराग धनखड़ सोमवार को अगरतला में पुलिस हेडक्वार्टर स्थित अपने ऑफ़िस में मृत पाए गए. आशंका जतायी जा रही है कि उन्होंने आत्महत्या कर ली है.
इस घटना से पूरे पुलिस महकमे और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने उनके शव को कब्जे में लेकर अस्पताल भिजवा दिया है। उनकी मौत की असली वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही पता चल पायेगा।
अनुराग धनखड़ 1994 बैच के त्रिपुरा कैडर के आईपीएस अधिकारी थे। उन्होंने अपने पुलिस करियर का बड़ा हिस्सा त्रिपुरा में बिताया और राज्य में करीब 16 वर्षों तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और पुलिस प्रशासन को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही।
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अनुराग धनखड़ को हाल ही में त्रिपुरा का पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया गया था। इससे पहले वे राज्य में डीजीपी (इंटेलिजेंस) के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने अमिताभ रंजन की जगह यह जिम्मेदारी संभाली थी।
अनुराग धनखड़ को सबसे ज्यादा पहचान उस समय मिली जब उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो में रहते हुए भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी से जुड़े पंजाब नेशनल बैंक घोटाले की जांच का नेतृत्व किया।
यह देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक था। इसमें करीब 13,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। धनखड़ के नेतृत्व में सीबीआई ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच को आगे बढ़ाया।
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सीबीआई में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान अनुराग धनखड़ ने पुलिस अधीक्षक, उप महानिरीक्षक, संयुक्त निदेशक और अतिरिक्त निदेशक जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।
उनकी पहचान एक कुशल और निष्पक्ष जांच अधिकारी के रूप में रही। सीबीआई के अलावा अनुराग धनखड़ ने CISF में महानिरीक्षक (कार्मिक) के रूप में भी सेवाएं दीं। वर्ष 2003-04 के दौरान वे संयुक्त राष्ट्र के कोसोवो मिशन का भी हिस्सा रहे।
इसके अलावा 2005 से 2013 और 2016 से 2023 तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहते हुए उन्होंने ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट, CISF और CBI में अहम जिम्मेदारियां निभाईं।
अनुराग धनखड़ गृह मंत्रालय के अधीन गठित 1984 के सिख विरोधी दंगों की विशेष जांच टीम (SIT) के अध्यक्ष भी रहे। इस दौरान उन्होंने कई पुराने मामलों की दोबारा जांच और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।








