रांची- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, रोजगारोन्मुख और वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने का रोडमैप तय करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड स्कीम का लाभ अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाए.
उन्होंने कहा कि आर्थिक अभाव किसी भी छात्र-छात्रा की उच्च शिक्षा में बाधा नहीं बनना चाहिए. इसके लिए कल्याण विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर योजना का दायरा बढ़ाया जाए.
सोमवार को प्रोजेक्ट भवन में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को ‘माइनिंग से माइंड’ की ओर ले जाने में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी. बैठक में विभागीय मंत्री सुदिव्य कुमार भी मौजूद थे.
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बैठक में बताया गया कि गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत अब तक 2,888 पात्र विद्यार्थियों को ऋण स्वीकृत करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है. इनमें 243 छात्र-छात्राओं को विभिन्न बैंकों के माध्यम से 64 करोड़ रुपये का शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जा चुका है. इस योजना में बैंक को राज्य सरकार पूरी गारंटी दे रही है.
मुख्यमंत्री ने दुमका फ्लाइंग इंस्टीट्यूट में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को भी योजना का लाभ देने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया.
मुख्यमंत्री ने मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना, मानकी मुंडा छात्रवृत्ति योजना समेत सभी छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ समय पर विद्यार्थियों तक पहुंचाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि विद्यार्थी कल्याण से जुड़ी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सरकार की प्राथमिकता है.
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मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगले 15 दिनों के भीतर झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग को पूरी तरह कार्यरत किया जाए. साथ ही शैक्षणिक सत्र 2026-27 से विश्वविद्यालयों में लाइव ऑनलाइन क्लास शुरू करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने को कहा. अधिकारियों ने बताया कि पहले चरण में झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय और बीबीएमके धनबाद से इसकी शुरुआत की जाएगी.
बैठक में मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा और रोजगारपरक कोचिंग संस्थानों की निगरानी के लिए गठित कोचिंग रेगुलेटरी अथॉरिटी को भी 15 दिनों के भीतर पूर्ण रूप से सक्रिय करने का निर्देश दिया.
मुख्यमंत्री ने बीआईटी सिंदरी को यूनिटरी यूनिवर्सिटी के रूप में अपग्रेड करने पर सहमति देते हुए जल्द विधेयक तैयार करने का निर्देश दिया. उन्होंने बीआईटी सिंदरी का संपूर्ण डिजिटल प्रेजेंटेशन तैयार करने और तकनीकी शिक्षा में इसे उत्कृष्ट संस्थान के रूप में विकसित करने की बात कही.
राज्य में तकनीकी शिक्षा को मजबूत करने के लिए पलामू, गिरिडीह, रामगढ़, गुमला, रांची, जमशेदपुर, बोकारो, गोड्डा और साहिबगंज में तकनीकी शिक्षा क्लस्टर विकसित किए जाएंगे. सरकार जल्द इस योजना को मूर्त रूप देगी.
बैठक में राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में पीपीपी मॉडल पर कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) सेंटर स्थापित करने पर सैद्धांतिक सहमति बनी. वहीं विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों की स्वीकृति, छात्रावासों की स्थिति की समीक्षा और उनके बेहतर प्रबंधन के लिए भी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया.
बैठक में निर्णय लिया गया कि झारखंड अर्बन प्लानिंग एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (जुपमी) का संचालन अब उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग करेगा. यहां बैचलर ऑफ प्लानिंग, मास्टर ऑफ प्लानिंग और एमबीए इन इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट जैसे नए कोर्स शुरू किए जाएंगे.








