पटना- बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए अभिषेक कुमार बंटी को बीजेपी ने प्रत्याशी बनाया था। लेकिन 72 घंटे बाद ही उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया। उन्होंने अचानक चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर दिया।
उनके इस फैसले से पूरे परिवार में दुख का माहौल है। अभिषेक बंटी के पिता रवींद्र प्रसाद ने इसे साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि यह किसका षडयंत्र है हम कह नहीं सकते लेकिन माता-पिता के केस को उभारा गया है। जिसका हमलोगों को बहुत दुख है।
एक निजी चैनल से बात करते हुए अभिषेक बंटी के पिता रवींद्र प्रसाद ने बताया कि अपने माता-पिता की प्रतिष्ठा बचाने के ख्याल से अभिषेक ने अपना नामांकन वापस लिया। उसको पता चला की माता-पिता का नाम चारा घोटाला से जोड़ा जा रहा है और वास्तव में यह बात है भी, इसीलिए प्रतिष्ठा बचाने के ख्याल से अभिषेक ने ऐसा किया।
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रवींद्र प्रसाद ने कहा कि हम लोग मीडिल परिवार से आते है, बड़ों की बात रहती तो कुछ और होता। उन्होंने आगे कहा कि अभिषेक 26 वर्षों से संघर्ष करता रहा, पार्टी के प्रति समर्पित कार्यकर्ता रहा।
लेकिन माता पिता के चलते उन्होंने नामांकन वापस लिया। हमलोग बहुत दुखी हैं कि नामांकन वापस ले लिया। ऐसा नहीं होना चाहिए था। कल तक जश्न का माहौल था, आज गम का माहौल हो गया।
उन्होंने बताया कि चारा घोटाला मामले को सीबीआई ने फाईनल कर दिया। पनिसमेंट हो चुका है हम ऑन बेल है इस जजमेंट के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील किये है। लंबा चौड़ा अमाउंट नहीं है मात्र 11 लाख घोटाला का आरोप है।
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टीवी पर 125 करोड़ रुपया दिखा रहा है,चुनाव के बाद उन सभी से पूछेंगे जो 125 करोड़ रुपये का घोटाला बता रहा है। जिन लोगों ने ऐसा प्रसारित किया है उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।
यह मात्र 11 लाख का आरोप है। इसे बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जा रहा है। पार्टी की छवि को बरकरार रखने के लिए अभिषेक ने यह कदम उठाया है। यह किसका षड्यंत्र है हम नहीं कह सकते हैं। किसी का षड्यंत्र है कि माता-पिता के केस को उभारा गया है। हम लोग बहुत दुख है।
बता दें कि बीजेपी ने जब अभिषेक बंटी को बांकीपुर से उम्मीदवार बनाया, तब उनके पारिवारिक बैकग्राउंड को लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे. इसके बाद जब पार्टी स्तर पर गंभीर समीक्षा और मंथन हुआ, तो उनके माता-पिता से जुड़े गंभीर वित्तीय भ्रष्टाचार और सीबीआई (CBI) मामलों का खुलासा हुआ।
CBI द्वारा दोष सिद्ध किए जाने के बाद, सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने बंटी के पिता रवींद्र प्रसाद और मां चंचला सिन्हा को दोषी करार देते हुए दो साल के सश्रम कारावास और कुल ₹25,000 के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
अभिषेक बंटी करीब दो दशक से बीजेपी से जुड़े रहे हैं, भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे हैं और उन्हें पूर्व विधायक नितिन नवीन का बेहद करीबी माना जाता है. लेकिन जैसे ही उनके माता-पिता के चारा घोटाले में शामिल होने और जेल की सजा काटने के दस्तावेजी सबूत सामने आए, बीजेपी नेतृत्व के होश उड़ गए.
विपक्ष इस मुद्दे को लेकर बीजेपी की ‘भ्रष्टाचार विरोधी’ छवि पर बड़ा हमला करने की तैयारी में था. पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस पर तुरंत कड़ा संज्ञान लिया और जांच-पड़ताल पूरी होने के बाद अभिषेक बंटी को नामांकन वापस लेने का सख्त निर्देश दिया. जिसके बाद बंटी ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को पत्र भेजकर अपना नाम वापस ले लिया.








