पटना- बिहार की राजधानी पटना में सायरन बजते ही अंधेरा छा गया. जो जहां था वहीं रुक गया. पटना की व्यस्त सड़कों पर भी गाड़ियां जहां से गुजर रही थी वहीं पर ठहर गयी.
दरअसल शाम 7:00 बजे से सिविल डिफेंस ब्लैकआउट और मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया. हवाई हमले जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी और तंत्र की प्रभावशीलता जांचने के लिए सरकार की ओर से इसका आयोजन किया गया.
पटना के अलावा पूर्णिया, बेगूसराय, कटिहार, किशनगंज और अररिया में भी बिजली सप्लाई रोकी गई. यह पूरा अभ्यास भारत सरकार के निर्देश पर सिविल डिफेंस मॉकड्रिल के तहत किया गया.
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प्रशासन ने पहले ही लोगों से अपील की थी कि शाम 7 बजे से 7:15 बजे तक किसी भी तरह की लाइट न जलाएं. सायरन बजते ही कई इलाकों में सड़कें और इमारतें अंधेरे में नजर आने लगीं. राज्य सरकार ने साफ किया कि यह किसी खतरे की स्थिति नहीं थी, बल्कि आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी को जांचने के लिए मॉकड्रिल की गई.
पटना में दोपहर 3 बजे से विशेष मॉक ड्रिल शुरू की गई. यह अभ्यास पटना डीएम ऑफिस और बिस्कोमान भवन में किया गया. करीब 40 से 45 मिनट तक चली इस ड्रिल में एयर स्ट्राइक जैसी स्थिति बनाकर सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी परखी गई.
मॉक ड्रिल के तहत घायलों को पटना के IGIMS अस्पताल ले जाया गया. वहां अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था और मेडिकल तैयारियों की भी जांच की गई. प्रशासन का कहना है कि इस तरह की मॉक ड्रिल का मकसद किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों और आम लोगों की तैयारी को मजबूत करना है.
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