डेस्क- जस्टिस यशवंत वर्मा के कैश कांड की सुनवाई से चीफ जस्टिस बीआर गवई ने खुद को अलग कर लिया है। बुधवार को सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा,’ मेरे लिए इस केस की सुनवाई में शामिल होना उचित नहीं होगा, क्योंकि मैं पहले भी इसका हिस्सा रहा हूं।’
दरअसल, 19 जुलाई को जस्टिस वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसमें उन्होंने इन-हाउस कमेटी की रिपोर्ट और महाभियोग की सिफारिश रद्द करने की अपील की थी। रिपोर्ट में घर में कैश मिलने के मामले में जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराया गया है।
जस्टिस वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में तर्क दिया था कि उनके आवास के बाहरी हिस्से में कैश बरामद होने मात्र से यह साबित नहीं होता कि वे इसमें शामिल हैं, क्योंकि आंतरिक जांच समिति ने यह तय नहीं किया कि नकदी किसकी है या परिसर में कैसे मिली।
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समिति के निष्कर्षों पर सवाल उठाते हुए उनका तर्क दिया है- ये अनुमान पर आधारित है। याचिका में जस्टिस वर्मा का नाम नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट डायरी में इसे ‘XXX बनाम भारत सरकार व अन्य’ के टाइटल से दर्ज किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस वर्मा की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने दलील रखी। उन्होंने कहा कि इसमें कुछ संवैधानिक मुद्दे हैं। कृपया जल्द से जल्द बेंच गठित करें। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले पर सुनवाई के लिए नई बेंच गठित करेंगे।
दूसरी तरफ, संसद में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही भी शुरू हो गई है। जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए 152 सांसदों ने 21 जुलाई को लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला को ज्ञापन सौंपा। राज्यसभा में 50 से ज्यादा सांसदों ने प्रस्ताव पर साइन किए।
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