पटना- RJD ने बिहार विधान परिषद के हालिया चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीतने वाले दो विधान पार्षदों के भाजपा में शामिल होने पर सवाल उठाए हैं।
रविवार को RJD कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्यसभा सांसद मनोज झा ने दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल की सदस्यता लेना संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल कानून का उल्लंघन है।
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मनोज झा ने कहा कि हम बिहार विधान परिषद के सभापति से मांग करेंगे कि दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षदों को अयोग्य घोषित किया जाए। इस मामले में चुनाव आयोग और सभापति के पास शिकायत भी दर्ज कराई जाएगी।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सभापति इस मामले में कोई फैसला नहीं लेते हैं तो बहुत बड़ा बवाल होगा। फिर सभापति इसे संभाल नहीं पाएंगे।
दरअसल, विधान परिषद चुनाव में तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. राहुल राज निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीते हैं। चुनाव जीतने के बाद दोनों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। इसी को लेकर RJD ने आपत्ति जताई है।
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मनोज झा ने कहा कि भाजपा के लोगों को इतनी भी समझ नहीं है कि कोई निर्दलीय विधान पार्षद किसी दल को समर्थन तो दे सकता है, लेकिन उस दल में शामिल नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि हमने वोट चोरी के बारे में सुना था, लेकिन भाजपा ने तो जनादेश की चोरी की है।
इससे पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी दोनों विधान पार्षदों के भाजपा में शामिल होने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 2(2) के अनुसार, कोई सदस्य निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित होने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है तो उसे सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
तेजस्वी ने संविधान के अनुच्छेद 191(2) और दसवीं अनुसूची के पैरा 6(1) का भी हवाला दिया था। उन्होंने कहा था कि दल-बदल के आधार पर किसी सदस्य की अयोग्यता पर फैसला लेने का अधिकार संबंधित सदन के सभापति को है। ऐसे में बंशीधर ब्रजवासी और डॉ. राहुल राज के खिलाफ तत्काल अयोग्यता की कार्रवाई होनी चाहिए।
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि अब निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा में शामिल होने पर वही लोग अपनी मर्जी से कानून चला रहे हैं। उन्होंने भाजपा और RSS को संविधान और लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुश्मन बताया था।








