पटना- बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है. सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि आखिर बिना विधायक या विधान पार्षद रहते हुए कैसे कोई मंत्री पद पर रह सकता है?
असल में याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में कहा कि दीपक प्रकाश न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के. गैर-विधायक को मंत्री पद पर बने रहने के लिए संविधान में छह महीने की छूट दी गई है लेकिन ये छूट केवल एक बार के लिए होती है. दीपक प्रकाश इस समयसीमा को पार कर चुके हैं.
सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच इस मामले की सुनवाई मंगलवार को करेगी. वहीं, बिहार सरकार ने कहा है कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करेंगे.
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इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ये पूरी तरह कानून का सवाल है. राज्य सरकार को बताना होगा कि कोई व्यक्ति बिना विधायक/विधान परिषद का सदस्य बने छह महीने से ज्यादा वक्त तक मंत्री कैसे बना रह सकता है. हम उनसे जवाब मांगेंगे.








