पटना- बिहार में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों युवाओं के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को जानकारी दी कि TRE-4 (शिक्षक भर्ती चरण-4) के तहत 32,388 शिक्षकों के पदों पर नियुक्ति के लिए शिक्षा विभाग ने अधियाचना बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) को भेज दी है। इसके साथ ही राज्य में चौथे चरण की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए इसे बिहार के युवाओं के लिए “एक और ऐतिहासिक सौगात” बताया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, युवाओं को रोजगार और विकसित बिहार के संकल्प को साकार करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह भर्ती अभियान शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ हजारों युवाओं को सरकारी नौकरी का अवसर देगा।
- Advertisement -
विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)
कुल 32,388 पदों पर होगी भर्ती
मुख्यमंत्री द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार TRE-4 के तहत विभिन्न कक्षाओं के लिए शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। पदों का वर्गीकरण इस प्रकार है—
कक्षा 1 से 5: 3,847 पद
- Advertisement -
विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)
कक्षा 6 से 8: 8,563 पद
कक्षा 9 से 10: 3,877 पद
कक्षा 11 से 12: 16,101 पद
इस प्रकार कुल 32,388 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
शिक्षा विभाग की ओर से अधियाचना भेजे जाने के बाद अब निगाहें बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि आयोग जल्द ही भर्ती का विस्तृत विज्ञापन जारी कर सकता है।
विज्ञापन जारी होने के बाद ऑनलाइन आवेदन, पात्रता, विषयवार रिक्तियां, आरक्षण, परीक्षा तिथि और चयन प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
TRE-4 भर्ती का इंतजार बिहार के लाखों अभ्यर्थी लंबे समय से कर रहे थे। शिक्षक अभ्यर्थी लगातार भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे थे। अब अधियाचना भेजे जाने के बाद उम्मीदवारों को उम्मीद है कि जल्द ही आवेदन प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। विशेष रूप से बीएड, डीएलएड, एसटीईटी और सीटीईटी/बीटीईटी जैसी पात्रता रखने वाले अभ्यर्थियों को इस भर्ती से बड़ा अवसर मिलेगा।
राज्य सरकार का कहना है कि बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति से सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर होगी। इससे प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर होगी। लंबे समय से रिक्त पड़े पदों के भरने से विद्यार्थियों को भी लाभ मिलेगा और स्कूलों में नियमित शैक्षणिक गतिविधियां मजबूत होंगी।








