डेस्क- सुप्रीम कोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और प्रदर्शन करना उनका संवैधानिक अधिकार है।
कोर्ट ने कहा कि जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी। साथ ही 18 साल से कम उम्र के उन प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि पहली नजर में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जरूरत दिखती है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस कार्रवाई को लेकर पहले दिए गए दिशा-निर्देशों को अब अपडेट करने का समय आ गया है।
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2018 में बने नियम 2026 में कितने कारगर हैं, इसकी भी समीक्षा होनी चाहिए, ताकि प्रदर्शन शुरू होते ही पुलिस के तय प्रोटोकॉल तुरंत लागू हो सकें। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन कानून तोड़ने वालों को सजा मिलनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि 250 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र जांच से प्रदर्शनकारियों और पुलिस, दोनों पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।
सुनवाई के आखिर में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जुनैद मलिक की याचिका पर बुधवार को सुनवाई की मांग का विरोध किया। इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि पहले याचिका की सभी तकनीकी कमियां दूर की जाएं।
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इसी दौरान एक वकील ने अपनी याचिका भी सूचीबद्ध करने की मांग करते हुए कहा कि हिरासत में लिए गए छात्रों की मदद के दौरान उन पर भी हमला हुआ था।
बेंच ने कहा कि इस मामले पर बुधवार को सुनवाई होगी, जबकि बाकी संबंधित मामलों को सोमवार को सुना जाएगा। जरूरत पड़ने पर अंतरिम आदेश भी जारी किए जाएंगे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई खत्म कर दी।
कोर्ट ने दिल्ली सरकार को जवाब दाखिल करने का मौका देते हुए दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, उत्तर प्रदेश, असम और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों को नोटिस जारी किया।








