डेस्क- दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बैनर तले जंतर मंतर पर छात्रों का आंदोलन जारी है. 20 जुलाई को ‘चलो पार्लियामेंट’ मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प हुई, जिसमें दर्जनों लोग घायल हुए.
यह आंदोलन अब मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, पटना से लेकर अन्य शहरों तक फैल चुका है. प्रदर्शन में ज्यादातर ‘जेन जी’ और छात्र शामिल हैं, जो शिक्षा व्यवस्था की खामियों, बेरोजगारी और अपने भविष्य को लेकर सड़कों पर उतरे हैं. सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने साफ कहा है कि यह आंदोलन अनिश्चित काल तक जारी रहेगा.
टेंट तोड़े जाने के बावजूद प्रदर्शनकारी वापस लौटे और मानसून की बारिश में भी धरना जारी रखे हुए हैं. सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती होकर भी भूख हड़ताल पर डटे हैं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
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इस बीच कॉकरोच पार्टी के चीफ अभिजित दिपके ने पथराव और हिंसा पर सफाई दी है. दिपके का कहना है कि ये हिंसा और पथराव बाहर से आए लोग फैला रहे हैं. छात्र ऐसा नहीं कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि ये गड़बड़ी फैलाने वाले लोग बाहर से जानबूझकर भेजे जा रहे हैं ताकि प्रोटेस्ट को बदनाम किया जा सके. दिपके ने सीधे बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी जानबूझकर लोगों को उकसाने का काम कर रही है.
अभिजीत दिपके ने बताया कि आंदोलनकारी करीब एक महीने से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से बैठे हुए थे. इस पूरे एक महीने के दौरान कोई बड़ी वारदात नहीं हुई.
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लेकिन जैसे-जैसे यह प्रोटेस्ट बड़ा होता गया, वैसे-वैसे बाहर से गुंडे भेजे जाने लगे. उनका कहना है कि यह सब सोची समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है ताकि आंदोलन कमजोर पड़ जाये।
पत्थरबाजी की घटनाओं पर बोलते हुए दिपके ने बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि पत्थरबाजी करने वाले भी बाहर से भेजे गए वही लोग हैं. उनके मुताबिक बीजेपी की पुलिस पत्थरों से भरे ट्रक मौके पर पहले से लाकर रखती है. इसके बाद बीजेपी से जुड़े गुंडे आकर पत्थरबाजी करते हैं.
दिपके का आरोप है कि इस पूरी घटना के बाद कांग्रेस और आंदोलन से जुड़े लोगों को जानबूझकर बदनाम किया जाता है, ताकि जनता की सहानुभूति आंदोलन से हट जाए.








