पटना- बिहार में सम्राट चौधरी के अगुवाई वाली एनडीए सरकार के फरमान के बाद 551 मॉडल स्कूलों को भगवा रंग में रंगा जा रहा है. इतना ही नहीं स्कूल के नाम भी बदल दिए हैं, जिसे लेकर विपक्षी दल कांग्रेस और आरजेडी ने सवाल उठाए हैं तो जेडीयू ने भी चिंता जाहिर की है.
दरअसल, बिहार की सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली सरकार ने 551 मॉडल स्कूलों को भगवा रंग में रंगने के फैसले के साथ स्कूल के नाम बदलकर ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ कर दिया है.
राज्य के सभी 551 मॉडल स्कूलों को भगवा रंग में रंगने के फैसले किया. बिहार शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों को जारी एक आदेश में उन्हें तुरंत केसरिया रंग-रूप अपनाने का निर्देश दिया.
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हालांकि, इन सभी स्कूलों का मौजूदा गुलाबी, आसमानी नीले या पीले रंग के बजाय केसरिया रंग में रंगने के फैसले की आलोचना हो रही है. न केवल विपक्ष, बल्कि बीजेपी की मुख्य सहयोगी जेडीयू ने भी सवाल उठाए हैं.
सरकार इस कदम का बचाव करते हुए BJP के प्रदेश उपाध्यक्ष संतोष पाठक ने कहा कि रंग का चुनाव ऊर्जा और सकारात्मकता” को दर्शाता है. उन्होंने कहा, विपक्ष बेवजह बुनियादी ढांचे में किए जा रहे प्रगतिशील सुधारों का राजनीतिकरण कर रहा है.
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा था कि विपक्ष बड़े पैमाने पर लागू किए जा रहे शैक्षिक सुधारों को देखने के बजाय हर चीज़ को RSS के नज़रिए से देख रहा है.
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इंडियन एक्सप्रेस को मुताबिक बिहार के मॉडल को भगवा रंग में रंगने पर चिंता जताते हुए जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि शिक्षा का कोई रंग नहीं होता. इसे केवल संविधान की प्रस्तावना में निहित भावना के अनुरूप होना चाहिए, न कि स्कूल की दीवारों पर किसी खास रंग के.
नीरज कुमार ने कहा कि हमारी एक और चिंता यह है कि बिहार के कई स्कूलों के लिए ज़मीन दान करने वालों के नाम ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ के साइनबोर्ड के नीचे लिखे जा रहे हैं. आदर्श रूप से, दानदाताओं के नाम नए नए नाम से पहले होने चाहिए.
RJD के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुबोध कुमार मेहता ने कहा कि हमें इसका अंदाज़ा था. यह शिक्षा के भगवाकरण की शुरुआत है. यह शिक्षा का आरएसएस मॉडल है.
बिहार में जिस दिन बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने मॉडल स्कूलों का नाम बदलकर सरस्वती विद्या निकेतन करने का फ़ैसला किया, उसी दिन हमें आरएसएस के एजेंडे की भनक लग गई थी.
बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कहा कि बीजेपी रंग बदलने में माहिर है. वे अब शिक्षा को एक निश्चित रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए सही है, इससे यह भी संकेत मिलता है कि बिहार नीतीश कुमार के बाद के दौर में प्रवेश कर चुका है. बीजेपी धीरे-धीरे आरएसएस के जाल में फंस रही है.








