पटना- बिहार विधान परिषद चुनाव में राजद द्वारा सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद बवाल मचा है. पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने SC/ST प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया.
बिहार विधान परिषद की सीटों के लिए राजद ने सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है. सोमवार को सुनील सिंह ने पार्टी की ओर से नामांकन भी दाखिल कर दिया. इसके बाद शिवचंद्र राम की नाराजगी खुलकर सामने आ गई. उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा कि यह फैसला उन्होंने भारी मन से लिया है.
शिवचंद्र राम ने अपने पत्र में साफ लिखा है कि वह पार्टी नहीं छोड़ रहे हैं. उनका इस्तीफा केवल संगठन के पद से दिया है. उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की विचारधारा और राजद के प्रति उनका विश्वास पहले की तरह बना हुआ है. लेकिन अपने समाज की भावनाओं और कार्यकर्ताओं की उम्मीदों को देखते हुए अब इस पद पर बने रहना उनके लिए संभव नहीं रह है.
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उन्होंने कहा कि वर्षों से वह पार्टी और सामाजिक न्याय की सोच के साथ जुड़े रहे हैं. राजनीति को उन्होंने कभी पद पाने का जरिया नहीं माना, बल्कि समाज के अधिकार और सम्मान की लड़ाई का माध्यम समझा.
शिवचंद्र राम ने कहा कि हाल के घटनाक्रम ने उन्हें अंदर तक दुखी कर दिया है. जहां भी वह जाते हैं, लोग उनसे सवाल पूछते हैं. समाज के लोगों की नाराजगी और निराशा देखकर उन्हें काफी पीड़ा होती है.
उन्होंने कहा कि उन्हें किसी पद का मोह नहीं है. पद मिले या न मिले, इससे उनके जीवन का उद्देश्य नहीं बदलता. लेकिन जिस समाज ने उन पर भरोसा किया, उसकी भावनाओं को अनदेखा करना उनके लिए आसान नहीं है.
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शिवचंद्र राम ने भावुक होते हुए कहा कि पिछले कई दिनों से वह मानसिक रूप से परेशान हैं. उन्होंने कहा कि पिछले चार रात से वह ठीक से सो भी नहीं पाए हैं. शिवचंद्र राम ने अपने पत्र में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और पार्टी नेतृत्व का आभार भी जताया.
उन्होंने कहा कि संगठन में काम करने का अवसर देने के लिए वह नेतृत्व के प्रति सम्मान रखते हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके मन में किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई नाराजगी या कटुता नहीं है. उनका फैसला पूरी तरह समाज की भावनाओं और अपने नैतिक दायित्व को देखते हुए लिया गया है.
शिवचंद्र राम ने कहा कि सामाजिक न्याय, सम्मान और बराबरी की लड़ाई उनके जीवन का उद्देश्य रही है और आगे भी बनी रहेगी. वह पद छोड़ सकते हैं, लेकिन समाज के अधिकारों और सम्मान के लिए संघर्ष करना नहीं छोड़ेंगे.








