पटना- पूर्व सांसद आनंद मोहन इन दिनों राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ते नजर आ रहे हैं. जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके हालिया बयानों पर खुलकर आपत्ति जताई है.
दरअसल, अपने बेटे चेतन आनंद को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने के बाद आनंद मोहन ने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जदयू के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार के सम्मान से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन उनकी यह रणनीति उलटी पड़ती दिख रही है.
विवाद की शुरुआत तब हुई जब आनंद मोहन ने सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जताई कि चेतन आनंद को सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया.
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इसके बाद उन्होंन कहा कि जदयू को खड़ा करने वाले नीतीश कुमार को वह सम्मान नहीं मिल रहा जिसके वे हकदार हैं. उन्होंने यहां तक कह दिया कि नीतीश कुमार को राजनीतिक रूप से “जिंदा दफन” कर दिया गया है.
आनंद मोहन ने शपथ ग्रहण समारोह में नीतीश कुमार की तस्वीर प्रमुखता से नहीं दिखने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि उनके करीबी नेता इस पर चुप क्यों हैं.
उनके बयान से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि उनकी चिंता सिर्फ बेटे के राजनीतिक भविष्य तक सीमित नहीं है, बल्कि वह नीतीश कुमार की गरिमा और विरासत को लेकर भी चिंतित हैं.
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हालांकि जदयू नेताओं ने उनके इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया. वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने आनंद मोहन पर तीखा हमला करते हुए उन्हें ‘धृतराष्ट्र’ बताया और कहा कि वह पुत्र मोह में अंधे हो गए हैं.
मंत्री लेशी सिंह ने स्पष्ट कहा कि नीतीश कुमार पार्टी के सर्वोच्च नेता हैं और उन्हें पूरा सम्मान मिल रहा है. वहीं जदयू नेता डॉ. सुनील कुमार सिंह ने कहा कि पार्टी से बड़ा कोई नहीं है और व्यक्तिगत या पारिवारिक महत्वाकांक्षा के लिए नीतीश कुमार के नाम का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह घटनाक्रम आनंद मोहन के लिए बड़ा झटका है. जिस मुद्दे को उठाकर वह खुद को नीतीश कुमार के सम्मान का रक्षक साबित करना चाहते थे, उसी ने उन्हें पार्टी के भीतर अलग-थलग कर दिया.








