रांची- झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि भारतीय समाज में विवाह का विशेष महत्व है. पति-पत्नी को वैवाहिक जीवन में आने वाली बीमारियों, परेशानियों और कठिन परिस्थितियों का सामना एक-दूसरे का साथ देते हुए करना चाहिए. केवल आरोप लगाने या कुछ असामान्य व्यवहार का हवाला देकर शादी खत्म करने की मांग नहीं की जा सकती.
कोर्ट ने पत्नी पर क्रूरता और मानसिक बीमारी का आरोप लगाकर तलाक मांगने वाले पति की अपील खारिज कर दी. साथ ही चतरा फैमिली कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पति की तलाक याचिका खारिज कर दी गई थी.
हाईकोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की. पति ने फैमिली कोर्ट, चतरा के 7 सितंबर 2024 के फैसले को चुनौती दी थी.
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फैमिली कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 की धारा 13(1)(ia) और 13(1)(iii) के तहत दाखिल तलाक की याचिका खारिज कर दी थी. हाईकोर्ट ने भी मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद फैमिली कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया.
पति का दावा था कि पत्नी की मानसिक स्थिति से जुड़ी जानकारी शादी से पहले छिपाई गई थी. उसने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि शादी के शुरुआती दिनों से ही पत्नी का व्यवहार असामान्य और आक्रामक था.
वह बिना किसी वजह के हंसती थी, खुद से बातें करती थी और रिश्तेदारों के सामने भी उचित कपड़ों के बिना आ जाती थी. वहीं, पत्नी ने मानसिक बीमारी के आरोपों को गलत बताया. उसने पति पर दहेज के रूप में पांच लाख रुपये की मांग को लेकर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था.
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सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि पत्नी अदालत में पूछे गए सवालों का सामान्य और उचित तरीके से जवाब दे रही थी. वह अपने बेटे की देखभाल कर रही थी और उसने पति के साथ दोबारा वैवाहिक जीवन शुरू करने की इच्छा भी जताई थी. दूसरी ओर, पति ने स्वीकार किया कि उसने पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण के लिए कोई आर्थिक सहायता नहीं दी थी.
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय समाज में विवाह को बहुत सम्मान दिया जाता है. वैवाहिक जीवन में अच्छे और बुरे दोनों तरह के दिन आते हैं.
कई बार गंभीर बीमारी और कठिन परिस्थितियां भी सामने आती हैं, लेकिन पति-पत्नी को मिलकर इन चुनौतियों का सामना करना चाहिए. शादी का रिश्ता केवल सुख के समय साथ रहने के लिए नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में भी एक-दूसरे का सहारा बनने के लिए होता है.








