डेस्क- देश को हिलाकर रख देने वाले 2006 के निठारी सीरियल किलिंग मामले में पिछले साल सुप्रीम कोर्ट से बरी हुए सुरेंद्र कोली (उम्र करीब 50 वर्ष) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है.
शुक्रवार को उत्तराखंड के हरिद्वार में उसका शव फंदे से लटकता मिला. हरिद्वार पुलिस के मुताबिक, जेल से बाहर आने के बाद कोली यहीं एक चाय की दुकान चलाकर अपना गुजारा कर रहा था और इसी दुकान में उसका शव पाया गया.
यह खौफनाक मामला दिसंबर 2006 में तब सामने आया था, जब नोएडा के सेक्टर-31 में स्थित मोनिंदर सिंह पंढेर की डी-5 कोठी के पीछे नाले से बच्चों की खोपड़ियां, हड्डियां, जूते-चप्पल और कपड़े बरामद हुए थे.
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न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार इस कांड में सुरेंद्र कोली पर 13 मासूमों की हत्या के आरोप लगे थे. उस वक्त इस बंगले को मीडिया और आम लोगों ने ‘हाउस ऑफ हॉरर्स’ (खौफ का घर) नाम दे दिया था. इसके बाद पंढेर और उसके घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था.
करीब 19 साल जेल में काटने के बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से बरी होकर जेल से निकलने के बाद कोली अपने पैतृक राज्य उत्तराखंड चला गया था. वह हरिद्वार में सप्त सरोवर रोड पर लालमाता मंदिर के सामने किराए पर चाय का एक छोटा सा दुकान चला रहा था.
यहां वह अपनी पुरानी पहचान छिपाकर नई शुरुआत करने की कोशिश की थी. आसपास के लोगों को उसकी पुरानी पृष्ठभूमि और निठारी कांड से जुड़े होने की कोई भनक नहीं थी.
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पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, जेल से बाहर आने के बाद वह गंभीर आर्थिक तंगी, अकेलेपन और पारिवारिक तनाव से जूझ रहा था. परिवार से उसका बहुत ज्यादा जुड़ाव नहीं रह गया था और सबसे दूर-दूर ही रहता था.
पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है. पुलिस का मानना है कि लंबे समय तक जेल में रहने के बाद समाज में दोबारा खुद को न ढाल पाना और पारिवारिक क्लेश इस आत्मघाती कदम की वजह हो सकती है.








