रांची- झारखंड के दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू पंचतत्व में विलीन हो गए. उनके छोटे बेटे हर्ष कुमार ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की. अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत कई नेताओं, समर्थकों और हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी.
सुदिव्य कुमार के पार्थिव शरीर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना मुर्मू सोरेन ने पुष्प अर्पित किए. पार्थिव शरीर को देखकर सीएम हेमंत के साथ कल्पना भी भावुक हो गईं.
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार के आवास पर पहुंचे. यहां पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किया. नमन करने के बाद राज्यपाल ने दुख व्यक्त किया.
- Advertisement -
विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)
सूबे के मंत्री राधाकृष्णा किशोर के अलावा मंत्री योगेंद्र महतो, झारखंड सरकार की अपर सचिव वंदना दादेल, पर्यटन सचिव नमन प्रियेश लकड़ा भी पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की.
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड सरकार के माननीय मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है. ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों एवं उनके समर्थकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें.
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर कहा कि इस खबर से मन अत्यंत व्यथित है. वे कुशल जनप्रतिनिधि एवं जनसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व थे. वे बहुत मिलनसार व्यक्ति थे.
- Advertisement -
विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)
केंद्रीय मंत्री सह कोडरमा सांसद अन्नपूर्णा देवी के साथ भाजपा सांसद ढुल्लू महतो उनके आवास पर पहुंचे. इसके अलावा धनबाद से भाजपा विधायक राज सिन्हा, बगोदर से भाजपा विधायक नागेंद्र महतो के अलावा भाजपा के कई नेता भी पहुंचे.
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार के आवास पर पहुंचे. उनके साथ सारठ विधायक उदय शंकर सिंह ऊर्फ चुन्ना सिंह भी आवास पहुंचे.
बता दें झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक और हेमंत सरकार में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का असामयिक निधन हो गया. देर रात अचानक सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां अहले सुबह उनका निधन हो गया.
मंत्री पिछले कई दिनों से गिरिडीह से बाहर थे और दो दिन पहले ही लौटे थे. शनिवार और रविवार की मध्यरात्रि वे हरसिंगरायडीह स्थित अपने घर पर थे, जहां अचानक उनके सीने में दर्द हुआ.
दर्द की शिकायत पर उन्हें रात में ही एक गिरिडीह के एक निजी अस्पताल ले जाया गया. जहां चिकित्सकों ने जांच और इलाज शुरू किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका.








