आरा- बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच लगातार आगे बढ़ रही है. सोमवार को न्यायिक जांच आयोग के समक्ष तीन अहम गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए.
इनमें मृतक की भाभी सुमन देवी और प्रत्यक्षदर्शी होने का दावा करने वाले सत्यनारायण चौधरी और मंटू कमकर शामिल हैं. तीनों ने पुलिस-प्रशासन पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाया.
तीनों गवाहों ने आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा के समक्ष घटना से जुड़ा अपना-अपना पक्ष रखा. गवाही के बाद मीडिया से बातचीत में सुमन देवी ने बताया कि आयोग के समक्ष उन्होंने घटना से संबंधित सभी तथ्यों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि आयोग ने उनसे घटना के क्रम, संबंधित पुलिस अधिकारियों और अन्य पहलुओं पर विस्तार से पूछताछ की.
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सुमन देवी के कहा कि जांच आयोग के अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि पूरी सुनवाई के बाद न्याय मिलेगा. उन्होंने कहा कि उनसे करीब डेढ़ घंटे तक पूछताछ हुई. न्यायिक जांच प्रक्रिया पर विश्वास जताते हुए दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की.
वहीं दूसरे गवाह सत्यनारायण चौधरी ने भी आयोग के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया. मीडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि उन्होंने आयोग को वही बातें बताईं, जो उनके अनुसार घटना के समय उन्होंने देखी. उन्होंने कहा कि आयोग ने उनसे घटना के संबंध में विस्तृत पूछताछ की और उन्होंने अपनी जानकारी के अनुसार पूरा घटनाक्रम बताया.
चश्मदीद ने दावा किया कि भरत तिवारी को जब प्रशासन ने मांग पूरी होने का आश्वासन दिया तो उसने हथियार फेंक दिया लेकिन इसके बावजूद उसे पुलिस पकड़कर 50 मीटर दूर ले गई और फिर गोली मार दी. सत्य नारायण चौधरी ने कहा कि जिस वक्त एनकाउंटर के नाम पर भरत की हत्या की गई, उस वक्त पुलिस-प्रशासन के 30-35 लोग मौजूद थे.
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बता दें , 17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में भोजपुर पुलिस ने एनकाउंटर के नाम पर भरत तिवारी को गोली मार दी थी. परिजनों का आरोप है कि उसने हथियार फेंक दिया था, इसके बावजूद उसे पास से गोली मारी गई. हालांकि पुलिस का दावा है कि आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी थी. न्यायिक जांच आयोग को मामले की निष्पक्ष जांच का जिम्मा मिला है.








